5:04 pm Sunday , 19 July 2026
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राजकीय महाविद्यालय में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक संवाद का हुआ संगम

राजकीय महाविद्यालय में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक संवाद का हुआ संगम

आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय, बदायूँ तथा एकेडमिक सोसाइटी फॉर ह्यूमैनिटीज एंड लिटरेरी रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “IC-Global Dialogues-2026” के दूसरे दिन विभिन्न अकादमिक सत्रों के माध्यम से ज्ञान, शोध और वैश्विक संवाद का व्यापक आदान-प्रदान हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता करते हुए समकालीन विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।


प्रथम सत्र की अध्यक्षता बरेली कॉलेज, बरेली की डॉ. वंदना शर्मा ने की। यह सत्र भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित रहा। मुख्य व्याख्यान-5 के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कला संकाय की अधिष्ठाता एवं उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की ऐतिहासिक समृद्धि तथा उसकी आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय विचारधारा आज भी वैश्विक बौद्धिक विमर्श को दिशा देने की क्षमता रखती है। मुख्य व्याख्यान-6 के अंतर्गत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शन एवं धर्म विभाग के प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, जो भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR), नई दिल्ली के सचिव भी हैं, ने अपने व्याख्यान में दर्शन, इतिहास और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भारतीय चिंतन परंपरा के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। इस सत्र में देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों द्वारा राजनीति विज्ञान विषय से संबंधित 32 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें समकालीन राजनीतिक विमर्श, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय राजनीति के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई।

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर, बरेली की डॉ. प्रिया सक्सेना ने की। यह सत्र अंतरराष्ट्रीय साहित्य और समकालीन विमर्श को समर्पित रहा। इस सत्र में पोलैंड स्थित जगिलोनियन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल स्टडीज से प्रो. (डॉ.) हलीना मारलेविच ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर नाईट ऑफ हैप्पीनेस विषय के संदर्भ में वैश्विक पहचान और साहित्यिक विमर्श पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसके पश्चात विभिन्न विद्वानों एवं शोधार्थियों द्वारा साहित्य एवं सांस्कृतिक अध्ययन से संबंधित 13 शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया।

तृतीय सत्र की अध्यक्षता एनएसयूटी, नई दिल्ली के डॉ. हिमांशु वार्ष्णेय ने की। इस सत्र में अर्थशास्त्र एवं वाणिज्य विषय से संबंधित समकालीन आर्थिक परिदृश्यों और नीतिगत चुनौतियों पर 9 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए दो समानांतर सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिनमें शारीरिक शिक्षा विषय के सत्र की अध्यक्षता प्रो. गौतम सिंह तथा भूगोल विषय के सत्र की अध्यक्षता प्रो. योगेंद्र सिंह ने की, और इन सत्रों में शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए।

सम्मेलन के दूसरे दिन की सफलता पर कॉन्फ्रेंस चेयरमैन डॉ. सतीश सिंह यादव ने कहा कि यह सम्मेलन केवल शोध पत्रों के वाचन का मंच नहीं है, बल्कि यह वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु विचारों के आदान-प्रदान का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। वहीं आयोजन सचिव डॉ. सचिन कुमार ने बताया कि दूसरे दिन 60 से अधिक शोध पत्रों का सफल प्रस्तुतीकरण इस सम्मेलन की अकादमिक गंभीरता और व्यापक सहभागिता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड मोड के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-शोधार्थी भी पोलैंड और मैसेडोनिया जैसे देशों के विद्वानों से सीधे संवाद स्थापित कर पा रहे हैं।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता ने सभी आमंत्रित वक्ताओं, प्रतिभागियों तथा शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजनों से ज्ञान, शोध और विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलता है तथा शिक्षकों और शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होता है।

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