बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं के विकास के लिए अच्छी सोच का समुंद्र बहाने वाले क्या इस लिए अच्छा सोचते हैं जो उनके लिए अच्छा हो। अच्छी सोच का परिणाम उनकी पार्टी की एक चेयरमैन भुगत चुकी हैं। जनसंघ से लेकर भाजपा तक हर समारोह में दरियां बिछाने में निरंतर सबसे आगे नजर आने वाले राश डीलर, हिंदूवादी नेता अच्छी सोच का इस लिए कोपभाजन बन चुके क्योंकि उनकी समाजसेवा की अच्छी सोच में फिट नहीं आई। यहीं नहीं उनकी अच्छी सेाच का परिणाम पिछले पांच वर्षो में बढते हुए आर्थिक स्तर की मीनार अच्छी सोच के चेश्में में पूरी तरह फिट हो गई है। क्षेत्र के समाज और विकास को समर्पित उनकी सोच के चश्में में सबसे पहले उनका सजातिय होना प्रथूम वरीयता में आता है जिसके चलते आधा दर्जन सजातियों को विकास की राह तैयार करके फिट किया गया, हालांकि कुछ लोग इस मामले में आर्थिक सौदेबाजी की बात कहते हैं लेकिन उससे हम सहमत नहीं हैं क्योंकि हमें तो यह लगता है कि सत्ता में आने के बाद जब सोच नहीं बदली तो ऐसा प्राणी अपनी सोच को घटिया नहीं कर सकता। फिलहाल जो हमें नजर आया लिख दिया चुनाव आने वाले हैं, मैदान में कुछ अपने जडों में मठठा लगाने जैसा विरोध करने वाले भी हैं हो सकता है कि जडों में मठठा लगाने वाले आर्थिक आरोप लगाकर उनकी सोच को बदलने का आरोप लगा रहे हो। हमारा एक ही अनुरोध है कि बिना आग के धुआं नहीं उठता तो आरोप क्यों लग रहे हैं। चुनाव की पूर्व बेला पर रंग मत बदलीय, सोच मत बदलीय बस घेराबंदी करने वाले काकस को कस कर रखिए।




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