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‘सिम बाइंडिंग’ साइबर ठगों की हर हरकत पर रहेगी पुलिस की नजर

‘सिम बाइंडिंग’ साइबर ठगों की हर हरकत पर रहेगी पुलिस की नजर

एक मार्च से सरकार ने किया बदलाव, मोबाइल में चलती सिम नंबर से ही चलेगी वाट्सएप-साइबर ठगों की आएगी आफत।

बदांयू 2 मार्च।

सरकार की नई ‘सिम बाइंडिंग’ गाइडलाइन से अब व्हाट्सएप के जरिए होने वाली साइबर ठगी पर लगाम कसने की तैयारी है। होली के मौके पर सक्रिय ठगों से बचने के लिए पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करने की अपील की है।

साइबर अपराधी कभी निवेश तो कभी नौकरी का झांसा देकर ठग रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर खातों में रकम जमा करा रहे हैं। आरोपी धोखाधड़ी के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं।

पुलिस को व्हाट्सएप नंबर मिल भी जाए तो भी पकड़ना आसान नहीं होता। मगर अब नए नियम से न सिर्फ गिरफ्तारी में आसानी होगी बल्कि पीड़ितों की रकम भी वापस दिलाने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक, जिस मोबाइल नंबर से आपने व्हाट्सएप अकाउंट बनाया है, वही सिम मोबाइल में सक्रिय होना चाहिए। सिम नहीं है, या सक्रिय नहीं है तो सर्विस बंद हो जाएगी। नया नियम एक मार्च से लागू होना था। इस नई व्यवस्था को सिम बाइंडिंग कहा जा रहा है। बदांयू पुलिस के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2025 में साइबर ठगी की 100 से ज्यादा और जनवरी व फरवरी में 10 प्राथमिकी दर्ज की गईं। इनमें ज्यादातर मामले व्हाट्सएप की ठगी के ही रहे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए फर्जी दस्तावेज़ से लिए गए सिम और खातों का प्रयोग करते हैं। जिस स्थान का सिम होता है, उस स्थान पर व्हाट्सएप अकाउंट नहीं होता है। भारत से बाहर भी व्हाट्सएप संचालित हो रहा होता है। वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का भी प्रयोग किया जाता है। ऐसे में अपराधी को पकड़ना आसान नहीं होता है। नई व्यवस्था से अपराधियों को पकड़ने में आसानी होगी।

होली पर भी हैं सक्रिय, झांसे में नहीं आएं।

त्योहार पर साइबर अपराधी ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। ऑफर का लालच देते हैं। रिवॉर्ड पॉइंट दिलाने की बात करते हैं। निवेश का झांसा देते हैं। ऑनलाइन टिकट, होम डिलीवरी के नाम पर ठगी करते हैं। परिचित और मित्र बनकर कॉल करते हैं। खातों में रकम जमा करा लेते हैं। किसी के झांसे में नहीं आएं। अनजान व्यक्ति रकम की मांग करता है तो कॉल काट दें। अनजाने लिंक पर क्लिक नहीं करें। एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करें। पुलिस, सीबीआई और कस्टम अधिकारी बनकर कोई डिजिटल अरेस्ट करने की बात करता है तो समझ जाएं कि ठगी होने वाली है। कॉल काट दें। किसी तरह की साइबर ठगी होने पर 1930 पर कॉल करें।

अमन वार्ष्णेय

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