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बदांयू 5 जनवरी।
नौकरी सुरक्षित उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर स्कूलों में कार्यरत अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होगी।
₹17,000 मानदेय मंजूर सुप्रीम कोर्ट ने अनुदेशकों को ₹17,000 प्रतिमाह मानदेय देने के आदेश को सही ठहराया।
सरकार की अपील खारिज -मानदेय बढ़ाने के खिलाफ यूपी सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 वर्षों से लगातार काम करने के कारण अनुदेशक “डीम्ड परमानेंट/फुल टाइम” माने गए।
कॉन्ट्रैक्ट खत्म नौकरी खत्म नहीं – संविदा अवधि पूरी होने के बाद भी अनुदेशकों की सेवा स्वतः समाप्त नहीं होती—कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी।
पद ऑटोमेटिक सृजित लगातार सेवा के कारण पद स्वत, सृजित माना गया।
अनुचित श्रम व्यवहार पर सख्ती – 2013 से ₹7,000 मानदेय को कोर्ट ने “अनुचित श्रम व्यवहार” कहा।
आर्टिकल 23 का हवाला -₹17,000 से कम मानदेय संविधान के अनुच्छेद 23 के विपरीत—सुप्रीम कोर्ट।
मानदेय पुनरीक्षण का अधिकार – अंशकालिक शिक्षकों को नियत अवधि पर मानदेय पुनरीक्षण का पूरा अधिकार।
2017–18 से ₹17,000 प्रभावी -अगले संशोधन तक ₹17,000 प्रतिमाह मान्य। 2017 से अब तक का मिलेगा एरियर
भुगतान की समय-सीमा तय – 1 अप्रैल 2026 से नियमित भुगतान शुरू।
4 फरवरी 2026 से 6 महीने में पूरा बकाया भुगतान अनिवार्य रूप से सरकार को करना पडेगा।
कोर्ट का सवाल सरकार से
“जब पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया—मानदेय देने में दिक्कत क्या है?”
अनुदेशकों के संघर्ष की जीत -यह फैसला शिक्षा, सम्मान और अधिकार तीनों की जीत है। इसी फैसले को लेकर जिले के अनुदेशकों में खुशी का माहौल है। एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं।
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