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बिल्सी बदांयू 4 फरवरी।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों में उत्तर-पुस्तिका के लेखन पैटर्न में सख्त सेक्शन-वाइज मूल्यांकन प्रणाली लागू की है। अब सही उत्तर भी अगर गलत सेक्शन में लिखा गया तो उसे अटेंप्ट नॉट डन मानते हुए शून्य अंक दिए जाएंगे, जिससे उत्तर लेखन में योजना और अनुशासन पहले से ज्यादा अहम हो गया है।
अब सिर्फ सही जवाब लिखना काफी नहीं, बल्कि जवाब सही सेक्शन में लिखा गया है या नहीं यह सबसे महत्वपूर्ण होगा।
यदि छात्र सही उत्तर भी गलत सेक्शन में लिख देगा तो वह उत्तर पूरी तरह मूल्यांकन से बाहर हो जाएगा और शून्य अंक मिलेंगे। यह नियम इतना सख्त है कि पुनर्मूल्यांकन या री-चेकिंग में भी कोई सुधार संभव नहीं होगा।
सीबीएसई ने मूल्यांकन को अधिक व्यवस्थित और निष्पक्ष बनाने के लिए अनुशासन-आधारित सेक्शन-वाइज मूल्यांकन प्रणाली शुरू की है। प्रश्न-पत्र और उत्तर-पुस्तिका दोनों को अब स्पष्ट सेक्शनों में बांटा गया है, ताकि अलग-अलग परीक्षक (सब्जेक्ट स्पेशलिस्ट) अलग-अलग हिस्सों की जांच कर सकें। गलत सेक्शन में लिखा उत्तर संबंधित परीक्षक तक पहुंचेगा ही नहीं और उसे अटेंप्ट नॉट डन मान लिया जाएगा।
विज्ञान विषय की नई संरचना (तीन अनिवार्य सेक्शन)
सेक्शन ए, जीवविज्ञान
सेक्शन बी, रसायन विज्ञान
सेक्शन सी, भौतिक विज्ञान
सामाजिक विज्ञान विषय की नई संरचना (चार अनिवार्य सेक्शन)
सेक्शन ए, इतिहास
सेक्शन बी, भूगोल
सेक्शन सी, राजनीति विज्ञान
सेक्शन डी, अर्थशास्त्र।
सीबीएसई परीक्षा के जानकारों ने बताया कि छात्रों को परीक्षा शुरू होने से पहले उत्तर-पुस्तिका में इन सेक्शनों की स्पष्ट हेडिंग लिखना अनिवार्य है। उत्तरों को ठीक उसी क्रम और सेक्शन में रखना होगा। किसी भी हाल में अलग-अलग विषयों के उत्तर एक सेक्शन में मिक्स नहीं होने चाहिए।
सीबीएसई द्वारा प्रदान किए गए 15 मिनट के रीडिंग टाइम का उपयोग अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। छात्रों को इस दौरान पूरी उत्तर-पुस्तिका की पेज प्लानिंग करनी चाहिए
जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंटरी शीट लेनी चाहिए और उस पर भी विषय व सेक्शन का नाम स्पष्ट लिखना चाहिए। सबसे बड़ा खतरा अटेम्प्ट नॉट डन का नियम है।
उदाहरण के लिए यदि कोई छात्र इतिहास का उत्तर भूगोल सेक्शन में या जीव विज्ञान का उत्तर रसायन विज्ञान सेक्शन में लिख देता है, तो वह उत्तर बिल्कुल नहीं चेक होगा। ऐसे में छात्र को उस प्रश्न के पूरे अंक गंवाने पड़ सकते हैं, जो कुल मिलाकर बड़े नुकसान का कारण बन सकता है। यह बदलाव मूल्यांकन में अनुशासन, स्पष्टता और प्रस्तुति को बढ़ावा देने के लिए है। अब सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि सही जगह पर सही तरीके से लिखना भी अंकों का आधार बनेगा।
समय रहते अभ्यास करने वाले छात्र ही इस चुनौती से पार पा सकेंगे।
अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह-घर पर असली उत्तर-पुस्तिका की तरह अभ्यास कराएं।
विज्ञान को तीन और सामाजिक विज्ञान को चार सेक्शनों में बांटने का नियमित प्रैक्टिस कराएं।
बच्चों को समझाएं कि अब स्पीड से ज्यादा सही प्लानिंग महत्वपूर्ण है।
सीबीएसई के आधिकारिक नमूना प्रश्न-पत्र और गाइडलाइंस को जरूर देखें।
गलती से गलत सेक्शन में शुरू हो जाए तो घबराएं नहीं उसे साफ-साफ काटकर सही सेक्शन में दोबारा लिखें।
हर सप्लीमेंटरी शीट पर विषय और सेक्शन का नाम जरूर लिखें।
अमन वार्ष्णेय
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