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जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा

आज दिनांक 29 जनवरी 2026 को जनहित सत्याग्रह मोर्चा और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयुक्त तत्वाधान में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी बदायूं के माध्यम से भेजा गया।
ज्ञात हो कि बदायूं जनपद में छुट्टा/बेसहारा पशुओं और बंदरों का उत्पात और भय लगातार बढ़ रहा है। इससे आए दिन घटनाएं होती रहती है। बन्दर और पशु खेत में काम करने वाले किसान परिवारों के लोगों पर हमले करते हैं। फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। ये जब सड़क पर आ जाते हैं तो सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इसके अलावा इन पशुओं से फसलों की रखवाली के लिए किसानों को जाड़ा, बरसात, गर्मी हर मौसम में रात को खेतों पर रहना पड़ता है। इनके कारण किसानों को जान – माल के नुकसान के साथ – साथ स्वास्थ्य का नुकसान भी होता है। शहरी इलाकों में भी छुट्टा/बेसहारा पशु दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
ऐसी ही घटना बदायूं जनपद के तहसील दातागंज के एक गांव गूरा बरेला में घटी। यहां एक 60 वर्षीय किसान महिला प्रेमा कश्यप पत्नी स्वर्गीय श्री सुखलाल 25 जनवरी को जंगल में लकड़ी बीनने गईं। जहां एक सांड ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें पटक पटक कर मार दिया और उनके ऊपर घंटों बैठा रहा। ग्रामीणों के हल्ला मचाने पर भी सांड नहीं हटा। पुलिस फोर्स के पहुंचने के बाद ही काफी मशक्कत के बाद उसे वहां से भगाया गया। उसके बाद ही सांड के हमले से मृतक प्रेमा कश्यप के शव को पोस्ट मार्टम को भेजा जा सका।
इस घटना के बाद से इलाके में डर का माहौल है। किसान समुदाय अपनी फसलों और अपनी सुरक्षा को लेकर परेशान है।
छुट्टा पशुओं और बंदरों से ग्रामीण समाज में किसानों में फसलों व सुरक्षा की समस्या और शहरी इलाकों में ट्रैफिक की समस्या विकराल होती जा रही है। इससे निपटने का उचित इंतजाम किया जाए। इस मामले को लेकर निम्न लिखित मांगों को ज्ञापन में शामिल किया गया।
ज्ञापन देने वालों में प्रेमपाल सिंह, चरन सिंह यादव, डा सतीश, आर के जौहरी, कृष्ण गोपाल, एड पवन गौतम, एड एस पी सिंह, एड प्रताप सिंह उर्फ जे पी सिंह, एड प्रतिपाल सिंह, एड मोहर सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
1 – सांड के हमले में घायल प्रेमा कश्यप के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।
2 – बदायूं जनपद के पूरे इलाके से बंदरों और छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर उनका उचित इंतजाम किया जाए।
3 – शहरी इलाकों में छुट्टा/बेसहारा पशु कूड़े के ढेर में पॉलीथिन चबाते देखे जाते हैं। इन पशुओं के चारे की व्यवस्था की जाए। पॉलीथिन के उत्पादन पर रोक लगाई जाए।
4 – छुट्टा/बेसहारा पशुओं के इंतजाम के लिए आसपास के वनों को संरक्षित कर उनकी बेरीकेडिंग की जाए। और वनों में पशुओं के लिए पानी का इंतजाम किया जाए।

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