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मौनी अमावस्या -मौन रहकर किया गंगा स्नान,फिर दान,कछला घाट पर उमड़े हजारों लोग

मौनी अमावस्या -मौन रहकर किया गंगा स्नान,फिर दान,कछला घाट पर उमड़े हजारों लोग।

उझानी बदांयू 18 जनवरी।

धर्म नगरी कछला में मौनी अमावस्या को लेकर गंगा घाट पर हजारों की भीड़ ने गंगा स्नान किया, इसके बाद दान-पुण्य। सुरक्षा की दृष्टि से जगह-जगह पुलिस टीम निगरानी कर रही थी।

मौनी अमावस्या पर्व पर कछला गंगा तट पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। आज भोर से ही घाट पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। हजारों की संख्या में भक्तों ने पूरे दिन गंगा स्नान कर मौन व्रत के साथ विधि-विधान से पूजन, दर्शन और दान किया। घाट पर हर-हर गंगे के जयकारों के बीच धार्मिक वातावरण बना रहा।

पुरोहित बताते हैं – मान्यता है कि गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा की धारा में स्नान वह भी मौनी अमावस्या के दिन, मौन रहकर स्नान और दर्शन-पूजन करने की प्राचीन परंपरा के निर्वहन के लिए विभिन्न जिलों से श्रद्धालु एक दिन पूर्व से ही कछला पहुंचने लगे थे।

आचार्य राजेश शर्मा बोले-दरअसल, मकर राशि जीव के शरीर का प्रतीक है, सूर्य आत्मा का और चंद्रमा मन का प्रतीक। इन तीनों का एक साथ योग ही मौनी अमावस्या है। यह अपने आत्म-साक्षात्कार का पर्व है।

उन्होंने कहा मानव शरीर में तीन तरह के मल हैं, जिन्हें साफ किया जाता है- कर्म, भाव और अज्ञान का मल। इनका नाश गंगा, यमुना और सरस्वती में मौनी अमावस्या के दिन केवल स्नान मात्र से हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सभी पापों से मुक्ति और भगवान वासुदेव का प्रेम पाने के लिए हर व्यक्ति को इस दिन स्नान करना चाहिए। इस दिन की विशेषता यह है कि गंगाजल से स्नान करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्ति पा लेता है।श्रृद्धालुओं ने मौन व्रत रख गंगा स्नान कर तिल-दान, वस्त्र-दान, अन्न-दान और ब्राह्मण सेवा कर अक्षय पुण्य प्राप्त किया।

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