उझानी- दिन ढलते ही स्टेशन रोड पर सज जाते हैं जानलेवा फास्ट फूड के स्टॉल ?.
नगर पालिका के गेट पर सजतीं है फास्ट-फूड की दुकानें, फुटपाथ पर छोड़ जाते हैं गंदगी।
उझानी बदांयू 6 जनवरी 2026।
शहर में दिन ढलते ही स्टेशन रोड “चटोरी गली” के रूप में नजर आता है,नगर पालिका के फुटपाथ पर जानलेवा फास्ट फूड के स्टॉल सज जाते हैं। जिधर देखो मोमोज, बर्गर, नूडल्स और चाऊमीन ठेलों पर नजर आती है। खाद्य विभाग को परवाह नहीं नगर पालिका के खाद्य निरीक्षक को भी यह नजर नहीं आते।
चिकित्सक बताते हैं फास्ट फूड में डाली जाने वाली चटनी उससे भी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि इसमें टमाटर या मिर्च के स्थान पर लाल व हरे रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। बीती देर शाम तक कछला रोड, बरी बाइपास , बिल्सी रोड, पंखा रोड, पर सड़क किनारे फास्ट फूड के ठेलों पर भीड़ दिखाईं देती है।
शहर की गलियों और बाजारों में बिक रहा फास्ट फूड बच्चों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। लजीज स्वाद और कम दाम के लालच में बच्चे खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों की ओर खिंचते चले जा रहे हैं, लेकिन इन पकवानों में छिपा संक्रमण उनके स्वास्थ्य को दिन-ब-दिन कमजोर कर रहा है। बदलती जीवन शैली व खानपान की आदतों ने लोगों का रुझान फास्ट फूड की ओर बढ़ा दिया है।
अब शहर की हर गली-मोहल्ले में मोमोज, बर्गर, नूडल्स और चाट-पकौड़े बेचने वाले ठेले नजर आ जाते हैं। ये खाने में सस्ते और स्वादिष्ट होते हैं, मगर साफ-सफाई की स्थिति बेहद चिंताजनक है। स्थिति यह है कि न तो विक्रेता हाथ धोते हैं और न ही भोजन को ढककर रखते हैं। नतीजा यह कि धूल-मिट्टी, मक्खियों व दूषित पानी के संपर्क में आकर यह खाना संक्रमण का माध्यम बन जाता है। और तो और कई बार का प्रयोग किया गया तेल ही दोबारा उपयोग में लाया जाता है। डायरिया, टायफाइड व पीलिया के मामलों में बढ़ोतरी होने का यही कारण है।
सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सर्वेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में आए अधिकांश बच्चे पेट दर्द, उल्टी-दस्त व तेज बुखार की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। परिजनों से पूछने पर ज्यादातर बच्चों के द्वारा मोमोज, बर्गर, नूडल्स और चाऊमीन खाने की बात पता चलती है।
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फास्ट फूड में प्रयुक्त रिफाइंड आटा, अधिक तेल, रंग, और कृत्रिम फ्लेवर न केवल पाचन तंत्र को कमजोर करते हैं, बल्कि मोटापा, गैस्ट्रिक परेशानी और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं भी बढ़ा रहे हैं। लगातार ऐसा भोजन लेने से बच्चों में इम्यूनिटी कम होती है और वह संक्रमण के शिकार जल्दी होते हैं। ऐसे में सड़क किनारे बिक रहा अस्वच्छ खाना हर दिन सैकड़ों बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।
-डॉ. इवा फरमान, पेटरोग विशेषज्ञ,निवा हाॅस्पीटल।
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राजेश वार्ष्णेय एमके





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