5:01 am Wednesday , 22 July 2026
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*हमारा भाग्य ईश्वर नहीं हम स्वयं लिखते हैं : आचार्य संजीव रूप*

साप्ताहिक सत्संग
( प्रज्ञा मंदिर में हुआ सत्संग )

बिल्सी, तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा एक मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया ! संसार के उपकार के लिए भगवान से प्रार्थना की गई ! अथर्ववेद के मंत्रों से यज्ञ किया गया ! इस अवसर पर वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा “मनुष्य पशु पक्षियों से भिन्न है क्योंकि मनुष्य ही सोच सकता है , मनुष्य ही गलत और सही का अंतर कर सकता है और मनुष्य ही अपनी नियति अपना भाग्य बदल सकता है !हमारा भाग्य ईश्वर नहीं लिखता , हम स्वयं लिखते हैं ।हम जब भी अच्छे कर्म करते हैं जैसे समाज में फैले हुए अज्ञान और पाखंड को दूर करते हैं संत विद्वान बनने के द्वार खुल जाते हैं ! जैसे ही अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाते हैं बलवान बनने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है जैसे ही दान करते हैं अभाव को दूर करते हैं जरूरतमंदों की सहायता करते हैं वैसे ही धनवान होने के द्वार खोल लेते हैं ! पं प्रश्रय आर्य ने यज्ञ कराते हुए कहा “खुद के सुधार से ही जग का सुधार होता है ! वाणी से नहीं आचरण से प्रभाव होता है !डॉ सत्यम आर्य, कुमारी तृप्ति शास्त्री, कुमारी कौशिकी रानी ने भजन गाए ! इस अवसर पर राकेश आर्य श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती भावना रानी, कुमारी मोना रानी, श्रीमती कमलेश कुमारी , श्रीमती मुन्नी देवी, श्रीमती सूरजवती देवी तथा आर्य संस्कार शाला के बच्चे मौजूद रहे !

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