8:45 pm Sunday , 19 July 2026
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बज़्म-ए-ज़की ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन

मोहल्ला सोथा में कामयाब ज़की के निवास पर बज़्म-ए-ज़की के तत्त्वावधान में एक शेरी नशिस्त (काव्य गोष्ठी) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ शायर डॉ. एहसान तथा मुख्य अतिथि सुरेन्द्र नाज़ रहे।
बिलाल कादरी ने नाते-पाक पढ़कर इस गोष्ठी का आग़ाज़ किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. एहसान ने पढ़ा-
हमारे हौसले सदियों से आसमान में है यह और बात हम टूटे हुए मकान में हैं

आरिफ परवेज नहीं पढ़ा-
हुनर से आगही से कट गया है
तआल्लुक शायरी से कट गया है

अहमद अमजद ने पढ़ा-
जो शायरी की सीन से वाक़िफ़ नहीं ज़रा
लो आज वो भी साहबे-दीवान हो गये

सुरेन्द्र नाज़ ने पढ़ा-
फरेबों से यह दुनिया पाक कर दे
या फिर मुझको खुदा चलाक कर दे
वह यह सीने पे लिखकर मर गया है
कोई है जो सुपर्द-ए-ख़ाक कर दे

इक़्तिदार इमाम ने पढ़ा-
मुश्किलें जब भी पड़ी मुश्किल कुशा आया है याद
वरना यह बंदा तिरी मस्जिद को कम कम जाए है
इनके अलावा डॉ. दानिश , बिलाल क़ादरी आदि ने अपने-अपने कलाम पेश किये। गोष्ठी का संचालन अहमद अमजदी ने किया। कार्यक्रम के अंत में साहिबे-ख़ाना कामयाब ज़की ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी काव्य गोष्ठियों से साहित्य को फरोग मिलता है। बज़्म-ए-ज़की ऐसी गोष्ठियाँ भविष्य में भी करवाती रहेगी और हिंदी व उर्दू दोनों जुबानों के साहित्यकारों को मंच मुहिया करवायेगी।

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