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*एमएफआई के कर्ज में जकड़ा महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता पर संकट के बादल

जिला संवाददाता सौम्य सोनी —

बदांयू 6 अक्टूबर।

महिला सशक्तीकरण का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार ने इसके लिए स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और माइक्रो फाइनेंस योजनाओं को बढ़ावा दिया है। ये योजनाएं महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक स्वावलंबन के लिए प्रोत्साहित करती हैं लेकिन माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) के अधिक ब्याज से बढ़ते कर्ज के तले दबकर महिला सशक्तीकरण योजना दम तोड़ने लगी है। महिलाओं के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

बदांयू जिले की रामो, रेखा, फूलमती, सोभा आदि महिलाओं ने बताया कि उन्होंने बकरी, भैंस पालन के लिए सोनाटा, कैशपार, उत्कर्ष, स्वतंत्र और बंधन माइक्रो फाइनेंस संस्थान से 19 से 26 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज लिया है।

फूलमती के मुताबिक, पहले 20 हजार, फिर 45 हजार रुपये कर्ज लिया था। जमा करने के बाद हाल ही में भैंस पालन के लिए एक लाख रुपये का कर्ज लिया है। साप्ताहिक किस्त 1280 रुपये जमा करना है। 104 सप्ताह किस्त अदा करना है लेकिन बीमारी के कारण भैंस बीमार होने से काफी दवा इलाज करना पड़ा है। इस कारण किस्त अदा नहीं हो पा रही है।
फाइनेंस संस्थान के अधिक ब्याज दर और वसूली एजेंट के कर्ज चुकाने के दबाव ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया है। रोजाना की मजदूरी से मिले रुपये से भी किस्त नहीं अदा हो पा रही है। वसूली एजेंट भैंस खोलने की धमकी दे रहा है। वहीं, शोभा देवी ने बताया कि 20 हजार रुपये कर्ज लेकर बकरी खरीदी थी। बीमारी से दोनो बकरियां मर गईं। मजदूरी कर किस्त अदा करनी पड़ रही है।

ग्रामीण महिलाएं जानकारी और अनपढ़ होने के चलते आसानी से कर्ज के जाल में फंस रही हैं। कई महिलाओं ने एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरे माइक्रो फाइनेंस संस्थान से कर्ज लिया है। हालत यह हो गई है कि महिलाओं पर तीन-तीन कंपनियों के कर्ज का चक्रव्यूह बन गया है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली जा रही है। ऐसे में उन्हे मानसिक तनाव के साथ-साथ वसूली एजेंट की प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है।

माइक्रो फाइनेंस संस्थानों का जाल गांव-गांव तक फैल चुका है। तकरीबन हर गांव में सैकड़ो महिलाओं ने ऋण ले रखा है। वसूली एजेंट साप्ताहिक ऋण की वसूली करते हैं। ऋण अदा नहीं करने पर महिलाओं को उनके मवेशियों को खोल ले जाने की धमकी देते हैं। सरकार को इन माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर रोक लगाने की आवश्यकता है। तभी महिला सशक्तिकरण अभियान सफल हो पाऐगा।

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