संस्कारों से दूर होती पीढ़ी: बच्चों में मोबाइल की लत बन रही सामाजिक चिंता : समाज दर्पण : प्रदीप प्रजापति
वर्तमान समय में बच्चों में तेजी से बढ़ती मोबाइल की लत समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी बनती जा रही है। यह लत केवल पढ़ाई या सेहत तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब पारिवारिक मर्यादाएं, सामाजिक व्यवहार और संस्कार भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों का कहना है कि अब बच्चे न मेहमानों को पहचानते हैं, न आदर करना जानते हैं। जब घर में कोई आता है, तो बच्चे मोबाइल में व्यस्त रहते हैं और संवाद से दूर हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को बचपन से संस्कार और सामाजिक व्यवहार नहीं सिखाए गए, तो आगे चलकर यही बच्चे रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारियों से कटे हुए होंगे।
इतना ही नहीं, अभिभावकों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जब बच्चे खाना खा रहे होते हैं, उस समय भी कई माता-पिता फोन में व्यस्त रहते हैं। और बच्चे अपने फोन में यह परिवार में संवादहीनता और भावनात्मक दूरी को बढ़ा रहा है।
समाजशास्त्रियों का सुझाव है कि हर परिवार को दिन का कुछ समय ‘नो मोबाइल ज़ोन’ के रूप में तय करना चाहिए, ताकि परिवार के सदस्य एक-दूसरे से बात कर सकें, बच्चों से जुड़ सकें और उन्हें जीवन के मूल्यों की शिक्षा दे सकें।
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