9:59 pm Thursday , 30 July 2026
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विश्व साइकिल दिवस पर विशेष

*अतुल वार्ष्णेय*

73 की उम्र में भी साथी बनी पुश्तैनी साइकिल
बिल्सी
तहसील क्षेत्र के ग्राम सिरतौल निवासी सतीश चंद्र शर्मा 51 साल से स्कूल से घर के सफर को साइकिल से तय करते आ रहे हैं, घर से विद्यालय तक प्रतिदिन 16 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। तब वह विद्यालय पहुंचकर हिंदी व संस्कृत पढ़ाते हैं। पुनः 16 किलोमीटर साइकिल चलाकर घर वापस आते हैं इस दौरान वह प्रतिदिन 32 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। आधुनिक युग में साइकिल का सफर सड़कों से गायब होता जा रहा है, ऐसी स्थिति में शिक्षक सतीश चंद्र शर्मा 73 साल के हैं और उनका हौसला अभी भी कायम है। वह लगातार साइकिल के सहारे ही अपने विद्यालय जाते हैं शिक्षक सतीश चंद्र शर्मा बताते हैं की बचपन में एक साइकिल थी साइकिल को पिता गंगा प्रसाद उपाध्याय चलाते थे उन्हें पैदल स्कूल जाना पड़ता था उस समय भी घर की हालत ठीक नहीं थी, इस वजह से दूसरी साइकिल की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। पिताजी ने ₹45 में एक नई साइकिल खरीद कर दी थी साइकिल एटलस कंपनी की थी उसे समय एटलस की साइकिल सबसे अधिक मजबूत होती थी इसका एहसास आज भी है वह प्रतिदिन 32 किलोमीटर साइकिल चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि घर से स्कूल की दूरी 16 किलोमीटर है ऐसे में आना जाना 32 किलोमीटर होता है वह साइकिल चलाने से एकदम स्वस्थ हैं वह कभी भी बीमार नहीं हुए उन्हें साइकिल चलाने से किसी तरह की थकान नहीं होती है।

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