बदांयू 31 मई।
उझानी की मेंथा फैक्ट्री में हुऐ अग्निकांड को 11 दिन हो गये, मगर जलकर मौत की आगोश में समाऐ मुजरिया थाने के गांव बिचौला जामुनी के मुनेन्द्र के शव को आज तक फैक्ट्री प्रबंधन व जिला प्रसाशन मलवे से निकलवाने में कामयाब ना हो सका। पीड़ित परिजनों का कहना है गांव आकर हालात देखने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि आए। परिजनों का कहना है कि नेता सिर्फ फोटो खिंचवाने और वीडियो बनवाने आते हैं, जबकि उन्हें मुनेन्द्र की तलाश है।
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परिवार के सदस्यों अनुसार, नेता यहां आकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और आश्वासन देते हैं कि उनकी बात संसद, विधानसभा तक पहुंचेगी। कोई एक दिवसीय उपवास पर बैठता है, दो करोड़ के मुआवजे की मांग करता है, कोई अपने शीर्ष नेतृत्व को बताने की कहकर निकल लेता है, मगर यह नहीं कहते पहले उन्हें मुनेन्द्र को तलाश करना है मुआवजा तो बाद की बात है, तत्काल आग से जली फैक्ट्री से मुनेंद्र को तलाश करने की जरूरत है। सिर्फ आश्वासनों से परिवार की कोई मदद नहीं होती है। ————————
परिजन मुनेन्द्र ना मिलने से त्रस्त, सत्ताधारी होल्कर जयंती मे मस्त ?
किसी महापुरुष, वीरांगना को याद करना बुरी बात नहीं, महारानी अहिल्याबाई होल्कर के महान कार्यों को याद करना हर भारतीय का कर्तव्य है, मगर दर्दनाक हादसे में ज़िंदा जले मुनेन्द्र के शव को फैक्ट्री से तलाश कराना भी नितांत आवश्यक है। घटना के 11 दिन बीतने के बाद भी सत्तासीन पार्टी के किसी नेता ने मुनेन्द्र की पत्नी रेखा या पिता व भाई को ढांढस बंधाना मुनासिब नहीं समझा। यह कहना तो दूर की बात कि मुनेन्द्र को तलाश कराने को उच्च अधिकारियों को कह दिया गया है। फैक्ट्री प्रबंधन व जिला प्रसाशन से मुनेंद्र को तलाश कराने की कहना भी मुनासिब नहीं समझा।
फैक्ट्री में मलवे का अंबार 10 दिन ओर लगेंगे सफाई करने में।
बताते हैं कि गाजियाबाद के मजदूर भी मलवे से लोहा काटने व मलवे को हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट करने को लेकर मजदूरी कम देने का आरोप लगाते हुए काम बंद करने का मन बना चुके हैं। कल इंस्पेक्टर नीरज मलिक के हस्तक्षेप से काम करने को राजी हुए।


मुनेन्द्र के नाते रिश्तेदार परिवार के सदस्यों संग फैक्ट्री में 24 घंटे मुनेन्द्र के शव की तलाश में लगे हैं। मजदूर जैसे ही मलवा हटाते हैं वैसे ही उनकी निगाहें मुनेन्द्र को तलाश करती है।
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