बदांयू 28 मई।
कुंडा नरसिंहपुर की मेंथा फैक्ट्री में ज़िंदा जले मुनेन्द्र के शव को तलाशने में शासन प्रशासन की कोई दिलचस्पी नजर नहीं आती। लगता है मुनेन्द्र राजनीति का शिकार हो गया ? तभी तो आठ दिन बीत जाने के बाद भी मुनेन्द्र के मिलने की संभावना क्षीण होती नजर आ रही है।
प्रसाशन का दावा गाजियाबाद से आई एक्सपर्ट टीम
लेकिन गाजियाबाद से आई 10 सदस्यों की टीम तो ठेकेदार की पुराना लोहा लंगड़ खरीदने वाली टीम लगती है उनपर मलवा हटाने को कोई समुचित मशीन नहीं है। उनकी बातों से लगता है कि वह सिर्फ पुराना कबाड़ खरीदते हैं।
पोकलेन,हाइड्रोलिक मशीन की जरूरत
बताते हैं कि कल गाजियाबाद से आई टीम के सदस्यों ने मलवा हटाने को पोकलेन व हाइड्रोलिक मशीनों की मांग की। कहा कि मुनेन्द्र के शव को ढूंढने में पहले मलवा हटाया जाएगा उसे हटाने में आठ से दस दिन लग सकते हैं।
ना कल कुछ हुआ ना आज।
धीरे धीरे मलवा हटाने का काम जारी है, एक्सपर्ट टीम की कार्यप्रणाली को देखकर ऐसा लगता नहीं कि वह मुनेन्द्र की तलाश में लगे हैं। उनके काम करने के तरीके से लगता है वह सिर्फ मलवे से लोहा लंगड़ ही निकाल रहे हैं।
इतने हो-हल्ला के बाद डांग स्क्वायड की मदद से इंकार क्यों
बताते हैं कि इतने हो-हल्ला के बाद प्रसाशन को डाॅग स्क्वायड की मदद से मुनेंद्र को खोजने का काम करना चाहिए। बताते हैं कि डाॅग स्क्वायड खोजी कुत्तों के हेंडलर उन्हें इस तरह से तैयार करते हैं कि वह विस्फोटक सामग्री, नशीले पदार्थ,व आपदा के वक्त मृतक व्यक्तियों के कपड़े की गंध से ही सटीक जगह पहुंच जाते हैं। तो क्यों ना डाॅग स्क्वायड टीम बुलाकर मुनेन्द्र के शव को तलाशने का काम किया जाए।
आखिर रेखा कब तक करे इंतजार


मृतक मुनेन्द्र की पत्नी कब तक सब्र करे। आठ दिन बीत जाने के बाद भी एक्सपर्ट टीम भी वक्त लगने की कह रही है। आखिर रेखा अपने पति मुनेन्द्र का कब तक इंतजार करें शासन प्रसाशन को उस दुखियारी के बारे में भी सोचना चाहिए। आखिर परिवार के सदस्य नाते रिश्तेदारों संग अब कब तक फैक्ट्री गेट पर बैठे रहे।
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