बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जिले की राजनीति में पारिवारिक विरासत को संभालनें में विफल रहने वाले लोगों पर निगाह डाली जाये तो दर्जनों नाम सामने आते हैं। पूर्व सांसद जयवीर सिंह कश्यप का नाम कभी जनपद की पहचान हुआ करता था। दातागंज की विधायक श्रीमती संतोष कुमारी पाठक की राजनति कौन नहीं जानता। बदायूं के सांसद ठा ओंकार सिंह का परिवार राजनीति से दूर क्यों हुआ। बदायूं के विधायक और मंत्री रहे श्रीकृष्ण स्वरूप वैश्य के परिवार को राजनीति से दूर किसने किया। भाजपा के अध्यक्ष रहे ठा नरेन्द्र सिंह आज राजनीति से तौबा करके क्यों बैठे हैं। सांसद सर्वराज सिंह और सासद राजवीर सिंह का परिवार आज कहां है। ठा अवनीश कुमार सिंह पप्पू भैया की ईमानदारी का उनके परिवार को क्या प्रतिफल मिला, राजा परषोत्तम लाल भदवार के परिवार की राजनीति से दूरी क्यों हुई। विधायक सोहन लाल पिप्पल की राजनीति किससे छिपी है। सहसवान के मीर परिवार की तूती अब खामोश क्यों दिखती है। सहसवान के विधायक अशर्फी लाल गुप्ता, बिसौली के विधायक बाबू ब्रज बल्लभ गुप्ता और उनके पुत्र विधायक योगेन्द्र गर्ग के बाद बिसौली की राजनीति से दूर कैेसे और क्या हुआ, प्रदेश सरकार में मंत्री रहे कृष्णवीर सिंह यादव और जनपद में बुआ जी के नाम से जानी जाने वाली सांसद श्रीमती शांति देवी के परिवार को राजनीति से दूर किसने किया। सहसवान के विधायक नरेश पाल सिंह यादव का किस्सा उनके निधन के साथ क्यों समाप्त हो गया। विधायक नरोत्तम सिंह का परिवार कहां की राजनेतिक कहानी बन कर रह गया। सांसद असरार अहमद, विधायक अवरार अहमद, मौलवी फखरे आलम, सांसद बाबू रघुवीर सहाय, विधायक, सांसद करन सिंह यादव, सांसद ब्रज राज सिंह उर्फ आछू बाबू और मंत्री रहे श्रीकृष्ण गोयल, विधायक जोगेन्द्र सिंह अनेजा, चौधरी राजेश्वर सिंह यादव कभी जनपद के गौरव रहे चौधरी वदन सिंह यादव, नगला शर्की निवासी विधायक कुंवर रूकुम सिंह राठौर के नाम वर्तमान राजनेतिक परिपेक्ष्य में बीते कल की ऐसी कहानी नजर आते हैं जिनको स्मरण करने के अलावा आगे और कुछ दिखाई ही नहीं देता। 












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