8:19 pm Wednesday , 22 July 2026
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रहते हैं उझानी तो मागें कहां पानी, यही तो है उझानी की कहानी ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान बदायूं जिले की आर्थिक राजधानी उझानी की वह प्रगति और पराक्रम किसी से छिपा नहीं है जब उझानी में शीतग्रह की भरमार थी, कपड़ों की थोक मंडी थी और राजनेतिक धुरी का निर्धारण उझानी से दिखा करता था। राजा जी की मिल, नौशेरा की गत्ता फैक्ट्री, उझानी के हजरतगंज निवासी कांग्रेसी ठा कैलाश कुमार सिंह के प्रयासों से बनी दि किसान सहकारी चीनी मिल, बदायूं की राजनीति में उझानी के राजा जी और श्रीकृष्ण गोयल की धमक के साथ रेलवे की आय का प्रमुख केन्द्र उझानी ही हुआ करता था।
आज राजनीति की बात करें तो उझानी निवासी बीएल वर्मा केंद्रीय मंत्रीमंडल में मंत्री हैं लेकिन उझानी वालों को रेल का स्टापेज बनवाने को संघर्ष करना पड रहा है। सपाई राजनीति का शिकार होकर रेलवे स्टेशन से हाल्ट बनने वाला कछला अपने पुराना वैभव पाने को तरस रहा है जिसके चलते जिले का सबसे प्रमुख भागीरथी तट , विकास की राह देख रहा है। कछला की गंगा आरती और गंगा स्नान करने वालों को परेशानी का सामना करना पड रहा है। लेकिन ना जाने क्यों हमारी केन्द्र और प्रदेश की धर्मभीरू सरकार को सपा सरकार के समय कछला पर लगे ग्रहण को हटाने पर ध्यान ही नहीं जा रहा है।
आजादी के अमृत महोत्सव में रेलवे स्टेशन तो आधुनिक बना मगर ट्रेंनों का स्टापेज नहीं, क्या फायदा ऐसे स्टेशन का जहां ट्रेन ना रूके। प्रदेश सरकार में बदायूं का प्रतिनिधित्व करने वाले पालनहारों को उझानी में बस अडडे की जरूरत कब महसूस होगी। आज आम आदमी इसी बात से परेशान हैं बस स्टैंड पर कब ध्यान दिया जाएगा जो उझानी अपना पुराना गौरव फिर से प्राप्त कर सके।

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