उझानी बदांयू 26 जनवरी।
नगर सहित हाइवे पर निराश्रित गोवंश किसानों की फसलों को बर्बाद करने के साथ सड़क हादसों का भी सबब बन रहे हैं। निराश्रित गोवंश के कारण जिले में पूर्व में भी कई सड़क हादसे हो चुके हैं। कुछ हादसों में लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं।
बदांयू में निराश्रित गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह न केवल दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए परेशानी भी खड़ी कर रहे हैं। वैसे तो जिले की गोशालाओं में जितने भी गोवंश हैं, उससे कहीं ज्यादा इनका रात में हाइवे की सड़कों पर बसेरा रहता है। आप की जरा सी लापरवाही हादसे का कारण बन सकती है। गोवंश की सुरक्षा के सरकारी दावे भी फेल साबित हो रहे हैं।
कछला रोड स्टेशन रोड समेत शहर के कई हिस्सों का यही हाल है। पेट भरने के बाद यह गोवंश अक्सर रात को सड़कों पर जाकर बैठे मिलेंगे। शहर का व्यस्ततम कछला मार्ग पर रात के समय गोवंश का जमावड़ा रहता है। इसके अलावा मंडी तिराहे पर गोवंश सड़कों पर पहुंच जाते हैं और सड़कों के बीच बैठ जाते हैं। कई बार तो वाहन के हॉर्न की आवाज सुनकर गोवंश विचलित भी हो जाते हैं और इधर-उधर भागने लगते हैं। इससे हादसा होने का डर अधिक रहता है।
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कई मार्गों पर स्ट्रीट लाइटें बंद होने से हादसों की आशंका बढ़ जाती है। कई दोपहिया वाहन चालक बेसहारा पशुओं के कारण हादसों का शिकार हो चुके हैं। बीच सड़क पर बैठे निराश्रित पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं के संबंध में लोगों से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा रात के समय वाहन चालकों को समस्या होती है। कुछ निराश्रित पशु ऐसे हैं जिनका रंग काला होता है और बीच सड़क पर झुंड़ लगाकर बैठे रहते हैं। तेज गति में आने वाले वाहन चालकों को ये दिखाई नहीं देते जिसके कारण दुर्घटना घट जाती है।
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गांव नरऊ निवासी निवासी नितिन ठाकुर ने बताया कि सड़क पर बैठे गोवंश से हादसा होने का डर अधिक रहता है। सरकार गोवंश के लिए कार्य तो कर रही है, लेकिन व्यवस्था संभालने वाले अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं।
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नगर निवासी केशव गर्ग का कहना है कि शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र सभी मुख्य मार्गों में निराश्रित पशु बीच सड़क पर बैठकर दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। इस पर जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। इन्हें पकड़वा कर गोशाला भिजवाएं।
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स्टेशन रोड निवासी प्रदीप शर्मा ने कहा कि कुछ गोपालक दुधारू गोवंश का दूध निकालने के बाद सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं। प्रशासन ऐसे गोपालकों को चिन्हित करके जुर्माना लगाए। साथ ही इनको जागरूक किया जाए।——————– राजेश वार्ष्णेय एमके।

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