Sugandha Sharma साखों पर उभरे,मोती से पूछो अम्बर में सूरज की,ज्योति से पूछो.. “इश्क़ यूँ आसाँ नही” राहों में रोते,राकिब से पूछो कविताओं में घुलते,गालिब से पूछो.. “इश्क़ यूँ आसाँ नही” पूछ सको तो,आत्मभेदी से पूछो मंडप में जलती वेदी से पूछो.. “इश्क़ यूँ आसाँ नही…!!❤️🧡 #सुप्रभात_जिंदगी #सुगंधा
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