12:42 pm Sunday , 9 August 2026
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साप्ताहिक सत्संग में आचार्य संजीव रूप ने बताया—जैसा सुनेंगे, वैसा ही बोलेंगे और वैसा ही आचरण करेंगे

साप्ताहिक सत्संग में आचार्य संजीव रूप ने बताया—जैसा सुनेंगे, वैसा ही बोलेंगे और वैसा ही आचरण करेंगे

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने वैदिक विधि से यज्ञ कराया। श्रद्धालुओं ने ऋग्वेद के मंत्रों का उच्चारण करते हुए यज्ञ में आहुतियां प्रदान कीं।
सत्संग को संबोधित करते हुए आचार्य संजीव रूप ने कहा कि श्रवण शब्द से सावन माह का नाम पड़ा है। श्रवण का अर्थ है—सुनना। मनुष्य के जीवन में वह बहुत महत्वपूर्ण है कि वह क्या सुनता है, क्योंकि जैसा हम सुनते हैं, वैसा ही बोलने और आचरण करने लगते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दो तोते थे। एक को कसाई अपने साथ ले गया और दूसरे को पुजारी। समय के साथ दोनों तोते बड़े हुए। कसाई के यहां रहने वाला तोता “लाओ, काटो, मारो” बोलने लगा, जबकि पुजारी के यहां रहने वाला तोता “ॐ, नमस्ते जी, बैठिए, राम-राम” बोलने लगा। दोनों ने वही सीखा जो अपने आसपास सुना। यही बात मनुष्य के जीवन पर भी लागू होती है।
आचार्य ने कहा कि यदि हम ईश्वर की वाणी, वेदों के ज्ञान और अच्छे संस्कारों को सुनेंगे तो हमारा आचरण भी श्रेष्ठ होगा। इसके विपरीत गलत और दूषित विचारों को सुनने से हमारे कर्म भी दूषित हो सकते हैं। इसलिए सावन के इस श्रवण माह में हमें उत्तम विचारों, वेदवाणी और सत्संग को सुनने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने वर्षा ऋतु में यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण अनेक प्रकार के कीट-पतंगे और सूक्ष्मजीव पनपते हैं। ऐसे समय में घर-घर यज्ञ की परंपरा को अपनाना चाहिए। यज्ञ वातावरण की शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और स्वस्थ जीवन के लिए उपयोगी वैदिक परंपरा है। परिवार के लोग मिलकर यज्ञ करें और घर में सुख-शांति एवं सद्भाव का वातावरण बनाएं।
इस अवसर पर कुमारी कौशिकी आर्य ने सुंदर भजन प्रस्तुत किया—
“संसार के पीछे मत भागो, संसार से सुख नहीं पाओगे,
जिनको तुम अपना समझ रहे, उनसे ही धोखा खाओगे।”
भजन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम में राकेश आर्य, श्रीमती लीलावती देवी, श्रीमती सुराजवती देवी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती कमलेश कुमारी, श्रीमती सरोज देवी सहित आर्य समाज के श्रद्धालु एवं आर्य संस्कार गुरुकुल के बच्चे उपस्थित रहे। सत्संग का समापन वैदिक प्रार्थना एवं मंगलकामना के साथ हुआ।

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