धर्मकांटा सही, भरोसा नहीं: उझानी मंडी के बाहर तौल की वजह से रोज लगता है 4 घंटे का जाम।
उझानी, बदायूं 12 जुलाई।
बरेली-मथुरा हाईवे पर स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति उझानी की अव्यवस्था किसानों और आम जनता पर भारी पड़ रही है। मंडी गेट पर लगा सरकारी धर्मकांटा तकनीकी रूप से सही है, लेकिन किसान उस पर भरोसा नहीं कर रहे। नतीजा ये कि ज्यादातर किसान हो या आढतिया मक्का की तौल बाहर लगे निजी धर्मकांटों पर कराने को मजबूर हैं और इसी वजह से रोज घंटों जाम लग रहा है।
मक्का की आवक बढ़ते ही सुबह 6 बजे से 11 बजे तक मंडी गेट से लेकर सीधे दिल्ली हाईवे तक ट्रैक्टर-ट्रालियों की लंबी कतार लग जाती है। सरकारी कांटे के बजाय किसान बाहर तौल कराना बेहतर समझते हैं। तौल के बाद ट्रालियां फिर मंडी गेट पर एंट्री के लिए खड़ी हो जाती हैं। इसी अव्यवस्था के कारण रोडवेज बस, एंबुलेंस, ई-रिक्शा और प्राइवेट वाहन घंटों जाम में फंस रहे हैं।
किसान और व्यापारी कह रहे हैं कि प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। मंडी में तौल को लेकर पारदर्शिता और समय की पाबंदी न होने से लोगों का भरोसा टूटा है। बाहर निजी कांटों पर भी लंबी लाइन मिल रही हैं।
कल मक्का लदे वाहनों की वजह से हाईवे करीब 3 घंटे तक पूरी तरह ठप रहा। गर्मी में घंटों खड़े किसान आक्रोशित हैं। उनका कहना है, “मंडी से करोड़ों का राजस्व जाता है, पर किसान की सहूलियत के नाम पर कुछ नहीं है।”
इस समय बदायूं के साथ बरेली कासगंज, एटा , फर्रूखाबाद और संभल के किसान भी मक्का बेचने उझानी आ रहे हैं। रोज हजारों क्विंटल आवक हो रही है। प्रशासन ने अब तक न तो मंडी में अतिरिक्त तौल की व्यवस्था की, न ही ट्रैफिक नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस लगाई।
किसानों की मांग है कि
मंडी के सरकारी धर्मकांटे पर पारदर्शी और तेज तौल व्यवस्था हो, ताकि किसान बाहर न जाएं।
मंडी परिसर में अतिरिक्त तौल केंद्र खोले जाएं।
मक्का सीजन तक हाईवे पर ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त तैनाती हो और वाहनों के लिए अलग लेन बनाई जाए।
अगर समय रहते प्रशासन नहीं जागा तो आने वाले समय में जाम और बड़ा होगा। सवाल सीधा है, राजस्व लेने वाली मंडी किसानों का भरोसा क्यों नहीं जीत पा रही?
रिपोर्ट: राजेश वार्ष्णेय एमके।



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