4:12 pm Monday , 20 July 2026
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उझानी का घंटाघर बना ‘जामघर’, बारिश में 1 घंटे तक रेंगते रहे लोग

पुलिस की गाड़ी भी फंसी, जल निगम की खुदी सड़कें बनीं मुसीबत।

उझानी-बदांयू 8 जुलाई।

शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले घंटाघर चौराहे पर रोज का तमाशा आज साप्ताहिक बंदी को भी दोहराया गया। दोपहर 1 बजे स्कूलों की छुट्टी होते ही लगा ऐसा जाम कि पुलिस की गाड़ी तक 60 मिनट तक उसी में घुटती रही। ऊपर से आसमान से झमाझम बारिश और नीचे कीचड़ से सनी सड़कें। नतीजा: राहगीर, स्कूली बच्चे और बाइक सवार सभी भीगते-भीगते घंटों फंसे रहे।

घंटाघर से कछला रोड तक का 500 मीटर का इलाका दोपहर 1 से 2 बजे तक पूरी तरह ठप रहा। ई-रिक्शा, बाइक, कार और पैदल लोग एक दूसरे से सटे खड़े थे। हॉर्न की आवाज, पानी के छींटे और गालियों का शोर ही उस एक घंटे की पहचान बना।

चौराहे पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी जाम खुलवाने की कोशिश करते रहे, लेकिन खुद उनकी गाड़ी जाम में फंस गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना ट्रैफिक प्लान और बिना मैनपावर के जाम हटाना नामुमकिन है।

शहरवासी सबसे ज्यादा नाराज जल निगम की लापरवाही से हैं। पाइपलाइन बिछाने के नाम पर शहर की मुख्य सड़कों को महीनों पहले खोद दिया गया था। काम खत्म होने के बाद सिर्फ मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया। न डामर, न पैचवर्क। बारिश होते ही वही गड्ढे कीचड़ का तालाब बन जाते हैं और जाम का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।

स्थानीय दुकानदार महेंद्र ने कहा, “रोज 3-4 बार जाम लगता है। एंबुलेंस तक नहीं निकल पाती। जिम्मेदार बस फीता काटने आते हैं, सड़क बनवाने नहीं।

उझानी को जाम से मुक्ति दिलाने वाला कोई ‘भागीरथ’ कब आएगा, ये सवाल हर चौराहे पर गूंज रहा है। न अतिक्रमण हट रहा है, न सड़कें बन रही हैं, न ट्रैफिक व्यवस्था सुधर रही है।

फिलहाल घंटाघर से गुजरने वाले हर व्यक्ति को यही सलाह है: घर से निकलने से पहले 1 घंटे एक्स्ट्रा लेकर चलें, छाता और धैर्य दोनों साथ रखें।

क्या प्रशासन इस ‘जामघर’ को दोबारा ‘घंटाघर’ बना पाएगा? जवाब अभी कीचड़ में फंसा हुआ है।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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