उझानी के बाजारों में छाई ‘काली बहार’ जामुन ने बदला शहर का मिजाज, सेहत का खजाना बना हर ठेला।
उझानी-बदांयू 2 जुलाई।
सावन से पहले ही उझानी के बाजारों में ‘काली बहार’ छा गई है। जून की शुरुआत के साथ ही शहर के गल्ला मंडी, स्टेशन रोड और सब्जी मंडी के हर ठेले पर काली-काली जामुन सज गई हैं। रस से लबालब जामुन देखकर लोगों की जुबान पर पानी आ रहा है और हाथ जेब पर पहुंच रहे हैं।
बाहरी इलाके के बागों से आई देशी जामुन की खुशबू ने पूरा बाजार महका दिया है। दाम भी जेब पर भारी नहीं, 120 से 160 रुपये किलो। इसलिए सुबह से शाम तक ठेलों पर भीड़ टूट रही है।
उझानी के आयुर्वेद चिकित्सक नवनीत शर्मा बताते हैं, “आयुर्वेद में जामुन को ‘जंबू’ कहा गया है। ये फल नहीं, पूरी दवा की दुकान है। इसका फल, बीज, छाल और पत्तियां, हर चीज औषधीय गुणों से भरपूर है।”
वैध नवनीत शर्मा के अनुसार जामुन के बीजों का चूर्ण मधुमेह रोगियों के लिए वरदान है। इसमें मौजूद ‘जंबोलिन’ तत्व खून में शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। यही वजह है कि डायबिटीज के मरीज ठेले वालों से सबसे पहले जामुन मांग रहे हैं।
जामुन में फाइबर का खजाना है जो अपच, गैस, एसिडिटी और दस्त में तुरंत राहत देता है। इसका कसैला गुण पेट को दुरुस्त रखता है। विटामिन-C, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण ये इम्युनिटी का बूस्टर है और हीमोग्लोबिन भी बढ़ाता है। बारिश के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए ये सबसे सस्ता कवच है।
आयुर्वेद विशेषज्ञों की मानें तो जामुन का मजा सिर्फ 2 महीने का नहीं है। इसका सिरका, जूस या बीजों का चूर्ण बनाकर पूरे साल इस्तेमाल कर सकते हैं। छाल का काढ़ा मुंह के छाले और गले की खराश में रामबाण है। जामुन का रस और शहद मिलाकर लगाने से चेहरे के मुंहासे और तैलीय त्वचा से छुटकारा मिलता है।
नवनीत शर्मा ने चेताया कि औषधीय उपयोग से पहले वैद्य या डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ज्यादा मात्रा में खाने से कब्ज की शिकायत भी हो सकती है।
फिलहाल उझानी में हर गली-नुक्कड़ पर जामुन का रंग चढ़ा है। स्वाद, सेहत और स्वदेशी का तड़का लगाकर ये काला फल हर किसी की पहली पसंद बन गया है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।




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