बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
विधानसभा चुनाव की तैयारियों की राजनेतिक महाभारत मेें भाजपा के पालनहारों द्वारा संगठन को क्षत्रप विहीन के साथ बदायूं विहीन बनाने का जो रंग दिखाया है उसने विधानसभा चुनाव में अपना रंग दिखा दिया तो जिले को भगवा करने की सारी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ सकता है। विदित रहे कि बदायूं में भाजपा का राजनेतिक मुकाबला समाजवादी पार्टी से होता है और बदायूं में सपा रणनीति बदायूं के सांसद आदित्य यादव और उनके पिता शिव पाल सिंह यादब के साथ बदायूं के पूर्व तथा वर्तमान में आजमगढ के सपा सांसद धर्मेद्र यादव बनाते हैं और पिछले दिनों जिले का प्रभारी मंत्री डा अरूण कुमार सक्सेना बनाकर ऐसी चाल चली थी जिससे स्थानीय भाजपाईयों के चेहरे पर रौनक ला दी थी लेकिन कल जारी होेने वाली भाजपा के संगठन की जारी सूची में क्षत्रप और स्थानीय लोगों को किनारे रखने की जो बात सामने आई है उसमें भाजपा के वोट बैंक वैश्य, क्षत्रिय एवं स्थानीय भाजपाईयों को पूरी तरह दूर सा रखा गया जिससे तो तमाम भाजपाईयों के साथ आम आदमी को ऐसा लगने लगा है कि भाजपा के पालनहारों ने सपा को ऐसा ब्रहमास्त्र दे दिया है जो भाजपा को परेशानी में डालने का काम कर सकता है।
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