कानों में ‘झुमका’, मन में योग: बदायूं में चेतना का महापर्व।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर ब्लूमस परिसर में सजेगा ‘योग विद झुमका’, CDO फूंकेंगी जनजागृति का शंखनाद।
उझानी-बदांयू 18 जून।
जब कर्ण सुनने को तत्पर हों और चित्त आत्ममंथन को उद्यत, तभी जीवन में योग का वास्तविक अवतरण होता है। इसी दार्शनिक सूत्र को साकार करने हेतु रामनाथ राम नारायण ट्रस्ट, उझानी 20 जून को ब्लूमस परिसर में ‘योग विद झुमका’ नामक एक विराट चेतना-यज्ञ का आयोजन करने जा रहा है।
संस्था के अध्यक्ष राजन मेंदीरत्ता ने उद्घाटित किया कि ‘झुमका’ मात्र श्रृंगार का आभूषण नहीं, अपितु बोध का प्रतीक है। तथागत बुद्ध की प्रतिमाओं में उकेरे गए दीर्घ कर्ण हमें श्रवण, मनन और निदिध्यासन का मर्म समझाते हैं। इस आयोजन का प्राणतत्व भी यही है कि मनुष्य बाह्य कोलाहल से परे अंतर्नाद को सुने। यह कार्यक्रम योगासन की भंगिमाओं तक सीमित न रहकर, स्वस्थ जीवन-दर्शन की ओर एक आध्यात्मिक यात्रा है।


इस ज्ञान-महोत्सव की मुख्य अतिथि जनपद की मुख्य विकास अधिकारी होंगी, जिनके मुखारविंद से योग की वैज्ञानिकता और उपयोगिता पर अमृतवर्षा होगी। प्रख्यात योगाचार्य श्वेता छबड़ा अपने सान्निध्य में बाल, युवा और वयोवृद्ध, सभी आयुवर्ग के साधकों को योग की गूढ़ क्रियाओं का बोध कराएंगी।
आयोजकों का संकल्प है कि योग को कुछ क्षणों के अभ्यास से निकालकर जीवन-पद्धति का अटूट हिस्सा बनाया जाए। आधुनिकता की अंधी दौड़ में विक्षिप्त हुए मन को यदि कोई संबल दे सकता है तो वह योग ही है। संस्था ने समस्त नगरवासियों का आह्वान किया है कि वे इस आत्मोत्थान के महापर्व में सहभागी बनकर अपने जीवन को आरोग्य और शांति के आलोक से आलोकित करें। आयोजन की तैयारियां अब पूर्णाहुति की ओर अग्रसर हैं।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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