कल चमन था, आज उजड़ गया आंगन: शादी से पहले कुंवरपाल का घर हुआ सूना।
भात मांगने निकलीं मां, बहन और दो भाभियां हादसे में काल का ग्रास बनीं।
उझानी-बदांयू 17 जून।
फिल्म वक्त का गाना ‘कल चमन था आज इक सेहरा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ’ कछला के मुरावन नगला गांव के कुंवरपाल पर पूरी तरह सटीक बैठता है। 29 जून को जिस घर में शहनाई बजनी थी, आज वहां सिर्फ सन्नाटा और चीखें हैं।
खुशियों की जगह पसरा मातम
डालचंद्र के बेटे कुंवरपाल की शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। घर में ढोलक की थाप पर मंगल गीत गूंज रहे थे। बुधवार को परिवार की महिलाएं शादी की रस्म ‘भात’ मांगने ननिहाल जा रही थीं। ई-रिक्शा में सवार मां राजकुमारी, बहन गंगा श्री और दो भाभियां प्रेम देवी व नारायणी देवी हंसी-खुशी निकली थीं।
मगर उझानी-बरेली हाईवे पर फूलपुर के पास रेस लगा रहे ट्रैक्टरों ने उनकी खुशियां रौंद दीं। भीषण टक्कर में चारों महिलाओं समेत कुल छह की मौके पर ही मौत हो गई।
एक पल में उजड़ गया परिवार
जिस कुंवरपाल के सिर पर सेहरा सजना था, उसके सिर से मां का साया उठ गया। बहन की राखी और भाभियों का प्यार हमेशा के लिए छिन गया। हादसे की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। जहां मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहां अब सिर्फ बिलखने की आवाजें हैं।
गांव में पसरा सन्नाटा
कुंवरपाल का घर ही नहीं, पूरा मुरावन नगला गांव मातम में डूब गया है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही सवाल, आखिर ट्रैक्टर चालकों की लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को क्यों उजाड़ दिया। शादी वाले घर में अब सिर्फ सफेद चादरें और टूटे हुए अरमान बचे हैं।
29 जून को बारात जानी थी, लेकिन वक्त ने कुंवरपाल को ऐसा जख्म दिया है जो शायद जिंदगी भर न भरे।
राजेश वार्ष्णेय एमके।


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