तहरीर वीरों की अपनी कचहरी, अपना दरबार बिना तहरीर के सब बेकार ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
उझानी कोतवाली के सामने सीएचसी गेट पर तहरीर वीरों द्वारा अपनी कचहरी बनाकर कुर्सी, मेज और चाय के साथ रोजाना खुला दरबार सजाया जाना आम आदमी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बात मारपीट की हो या गाली गलौज की हो अपना दर्द लेकर कोई फरियादी कोतवाली पहुंचता है तो फरियादी को उसकी बात और दर्द सुनने से पहले गेट पर फैसला सुना दिया जाता है। चर्चा है कि मेडिकल रिपोर्ट और तहरीर का रेट कार्ड पहले से निर्धारित है और तहरीर वीरों के दरबार में दोनों पक्षों से मोटी रकम लेकर फाइल वहीं दफना दी जाती है। इस मामले का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि तमाम खाकी वर्दी वाले अक्सर खुद तहरीर का ड्राफ्ट पूछने तहरीर वीरों के चरणों में हाजिरी देते नजर आया करते हैं जिसके चलते ऐसा लग रहा है कि कानून की किताब छोड़ दलाल की कलम चल रही है और पीड़ित को इंसाफ की जगह सौदेबाजी करने को चक्कर पर चक्कर मिल रहे हैं क्योंकि बिना तहरीर के कोई बात सुनी नहीं जाती और तहरीर दरबार के तहरीर वीरों से लिखवाई जाने वाली तहरीर को वीआईपी तहरीर की श्रेणी मिल जाती है। लोगों की मानें तो उझानी कोतवाली पुलिस ने आंखों पर पट्टी बांध ली है और उनकी निगाह में तहरीर वीर उनके ऐसे सहायक हैं जो तहरीर लिखने से लेकर मामले में सौदेबाजी कराने में अहम भूमिका में नजर आते हैं।
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