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बिल्सी में ‘जल प्रलय’ से हाहाकार: बांस बरौलिया बना तालाब, ग्रामीणों ने खोला अफसरों के खिलाफ मोर्चा

बिल्सी में ‘जल प्रलय’ से हाहाकार: बांस बरौलिया बना तालाब, ग्रामीणों ने खोला अफसरों के खिलाफ मोर्चा।

बदायूं 20 मई 2026।

विकास के तमाम दावों के बीच बिल्सी तहसील का बांस बरौलिया गांव आज ‘डूब क्षेत्र’ में तब्दील हो चुका है। गांव के मुख्य रास्तों से लेकर घरों के सामने की गलियां तक गंदे पानी और कीचड़ से लबालब हैं। हालात इतने बदतर कि पैदल निकलना जंग लड़ने जैसा हो गया है।

लंबे समय से बनी जलभराव की समस्या से आजिज आकर सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। धर्मवीर, गौरव, याद किशोर, ऋषि पाल, छोटेलाल, हेम सिंह, नंदकिशोर, राजू, भगवान स्वरूप, दिनेश, दीपक, हिमांशु और प्यारेलाल के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने गांव में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी कर जमकर नाराजगी जताई।

ग्रामीण धर्मवीर ने बताया कि गांव के मुख्य रास्तों और गलियों में महीनों से पानी भरा हुआ है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होती और जल निकासी का कोई स्थायी इंतजाम नहीं है। नतीजा, घरों का गंदा पानी और बारिश का पानी सीधे सड़कों पर जमा हो जाता है। “दर्जनों बार शिकायत कर चुके, पर अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती”, धर्मवीर ने कहा।

जलभराव से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को हो रही है। फिसलन भरी गलियों में गिरने का डर हर वक्त बना रहता है। गंदे पानी की बदबू और मच्छरों के प्रकोप से डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोग फैलने का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे हैं।

आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नालियों की सफाई और जल निकासी का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो तहसील मुख्यालय का घेराव कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। “वोट मांगने नेता आते हैं, समस्या बताओ तो अफसर गायब हो जाते हैं। अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है”, गौरव ने कहा।

अब बड़ा सवाल: क्या बांस बरौलिया के लोगों को भी अपनी समस्या के लिए किसी ‘वीवीआईपी’ की सिफारिश चाहिए? या ग्राम पंचायत और ब्लॉक के अफसर खुद कुंभकर्णी नींद से जागेंगे? फिलहाल गांव के लोग कीचड़, बदबू और बीमारियों के बीच ‘स्वच्छ भारत’ के नारे को सच होता देखने का इंतजार कर रहे हैं।

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