उझानी में ‘पावर का फ्यूज’ उड़ा: 5 एमवीए ट्रांसफार्मर धड़ाम, आधा शहर झुलसा, रोस्टिंग बनी ‘जले पर नमक’
उझानी बदांयू 21 मई।
44 डिग्री की आग उगलती गर्मी में बिजली विभाग ने उझानी की जनता को तवे पर बैठा दिया है। कल शाम 5 एमवीए का ‘नया’ ट्रांसफार्मर आखिरी हिचकी लेकर फुंक गया और पूरा शहर एक झटके में 19वीं सदी में पहुंच गया।
‘तीन चलो-दो रोको’ का सरकारी फॉर्मूला
ट्रांसफार्मर फुंकते ही विभाग का देसी जुगाड़ शुरू। शहर के पांचों फीडरों में से अब एक साथ सिर्फ तीन को ही ‘संजीवनी’ मिल रही है। मतलब साफ है- आधा शहर रोशन तो आधा शहर कोयले की खान। दो-दो घंटे की रोस्टिंग ने लोगों का चैन-सुकून छीन लिया।
इन्वर्टर ने भी हाथ खड़े किए, जनता छत पर
जिन घरों में किस्मत से इन्वर्टर हैं, वो भी दो घंटे की सप्लाई में चार्ज होने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। जिनके यहां नहीं हैं, उनका तो भगवान ही मालिक। रात होते ही पूरी उझानी की छतें ‘रैन बसेरा’ बन जाती हैं। बच्चे-बुजुर्ग पसीने में नहाकर सुबह का इंतजार करते हैं।
व्यापारी नेता का फ्यूज उड़ा, दी आंदोलन की धमकी
बिजली के इस ‘करंट’ से सबसे ज्यादा झटका व्यापारियों को लगा है। व्यापारी नेता अभिनव सक्सेना का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने कहा, “दुकानें गर्मी से श्मशान बन गई हैं। ग्राहक घुसते ही भाग जाता है। शहर में हर दिन 10-15 AC और 20 कूलर बढ़ रहे हैं, पर विभाग 5 एमवीए के खटारा ट्रांसफार्मर से काम चला रहा है। ये तो फुंकना ही था। अब 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर की आवश्यकता है कागजी डिमांड बहुत हो गई, अब जमीन पर करंट चाहिए।”
‘गारंटी’ वाला ट्रांसफार्मर भी कहीं ‘चाइनीज’ तो नहीं ?
सूत्रों की मानें तो फुंका हुआ ट्रांसफार्मर अभी गारंटी पीरियड में ही था। यानी गारंटी भी गर्मी सहन नहीं कर पाई। एसडीओ प्रशांत वार्ष्णेय ने रटा-रटाया बयान दिया, “उच्चाधिकारियों को डिमांड भेज दी है, जल्द व्यवस्था होगी।” लेकिन उझानी पूछ रही है- ‘जल्द’ कब आएगा साहब?
बिजली गई, पानी भी रूठा
बिजली की लुका-छिपी ने पेयजल सप्लाई की सांसें भी रोक दी हैं। बिजली-पानी दोनों से महरूम जनता अब विभाग को कोसते-कोसते हलक सुखा रही है।
अब मंथन नहीं, एक्शन चाहिए
हर साल गर्मी आते ही ट्रांसफार्मर का हांफना और जनता का बिलबिलाना उझानी की नियति बन चुका है। बिजली विभाग को अब एसी कमरों में मंथन नहीं, जमीन पर ट्रांसफार्मर लगाकर जनता को इस ‘नरक’ से निजात दिलानी होगी। वरना वो दिन दूर नहीं जब जनता का गुस्सा फुंके हुए ट्रांसफार्मर से ज्यादा खतरनाक हो जाएगा।
— राजेश वार्ष्णेय एमके।


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