उझानी- गली के शेर बने सिरदर्द, कुत्तों का आतंक और सिस्टम की फाइलें ‘सो’ रही।
उझानी बदायूं 20 मई ।
दिल्ली तो छोड़ो, अब अपने उझानी में भी कुत्तों की दादागिरी चरम पर है। गली-मोहल्लों में झुंड के झुंड घूम रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने से डरें, बुजुर्ग सुबह टहलने निकलने से कतराएं। और सिस्टम? वो कागजों में नसबंदी कर रहा है।
उझानी के मेन बाजार, रेलवे रोड, कछला रोड, पुरानी अनाज मंडी, साहूकारा,पंखा रोड से लेकर गांव-देहात तक एक ही रोना। दिन हो या रात, बाइक वालों के पीछे दौड़ना, बच्चों पर झपटना, दुकानों के बाहर डेरा डालना इनका रोज का काम है।


उझानी CHC में रोज 50-70 लोग सिर्फ कुत्ता काटने का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। डॉक्टर साहब बोले: “सुई कम पड़ जा रही, मरीज ज्यादा आ रहे।”
उझानी नगर पालिका के पास एक भी डॉग शेल्टर नहीं। नसबंदी सेंटर? का नामो निशान नहीं ,टीम आज तक बनी नहीं शहर में कुत्ते मजे से बढ़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का नियम वही पुराना, पकड़ो-नसबंदी करो-टीका लगाओ-वापस छोड़ो। लेकिन “पकड़ो” वाला काम ही नहीं हो रहा।
कोर्ट ने आदेश दिया फीडिंग पॉइंट बना दिऐ जाऐ। तर्क था कि एक जगह खाना मिलेगा तो कुत्ते कंट्रोल में रहेंगे। हुआ उल्टा। जहां रोटी डाली, वहीं 15-20 का झुंड जमा। मोहल्ले वाले बोले: “भाई साहब, खाना डालने वाले तो पुण्य कमा गए, भुगत हम रहे।”
अब बदायूं जिला प्रशासन भी प्लान बना रहा है। हर ब्लॉक में डॉग शेल्टर, माइक्रोचिप लगाने की बात, 5 नए नसबंदी केंद्र खोलने का वादा। बजट में लाखों का प्रावधान। लेकिन उझानी वालों का सवाल: “कागज से निकलकर जमीन पर कब आएगा?”
डॉक्टर की सलाह –
कुत्ता काटे तो घाव को 15 मिनट नल के नीचे साबुन से धोओ।
डिटॉल लगा लो, पर इंजेक्शन जरूर लगवाओ।
टीके लगते हैं: 0, 3, 7 और 28 वें दिन। एक भी मिस मत करना
खून निकले तो एंटी रेबीज सीरम भी लगेगा।
एक तरफ दुकानदार, स्कूल वाले बच्चे के पेरेंट्स बोले: “भाई हटाओ इन्हें, जीना मुहाल है। सुप्रीम कोर्ट ठीक बोल रहा।”
दूसरी तरफ डॉग लवर बोले: “कसूर कुत्तों का नहीं, कूड़े का है। शहर साफ रखो, नसबंदी करो, ये खुद शांत रहेंगे।
दिल्ली में रोज 1500 केस, उझानी में 50 केस। आबादी के हिसाब से रेश्यो वही। फर्क बस इतना कि दिल्ली की फाइलें AC में सोती हैं, यहां की पंखे में।
कोर्ट का ऑर्डर आए 3 महीने हो गए। उझानी में शेल्टर की एक ईंट नहीं लगी। कुत्ते बढ़ते जा रहे, सिस्टम की तैयारी अभी भी फाइलें चाट रही।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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