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प्रचार का पहिया, हकीकत पंचर- पेट्रोल बचाओ अभियान: नीयत में डीजल, दिखावे में साइकिल

“बदांयू एक्सप्रेस संपादकीय: प्रचार का पहिया, हकीकत पंचर”

पेट्रोल बचाओ अभियान: नीयत में डीजल, दिखावे में साइकिल।

बदांयू 15 मई।

प्रधानमंत्री की एक अपील, और पूरा तंत्र “फोटो खिंचाओ अभियान” में जुट गया। यूपी से लेकर बदायूं तक हर कोई पर्यावरण प्रेमी बनने की होड़ में है। पर ये प्रेम सिर्फ कैमरे के सामने उमड़ता है, कैमरा ऑफ होते ही सरकारी बोलेरो का साइलेंसर गरम हो जाता है।

दोहरा चरित्र देखिए
सुबह पुलिस की साइकिल रैली, झंडे-बैनर, “हम बदलेंगे युग बदलेगा”।
दोपहर: उसी थाने की जीप 8 का एवरेज देकर वसूली पर निकल पड़ती है।
शाम: नेता जी का ट्वीट – “आज 11 नंबर से चला, आप भी चलें”। ट्वीट के नीचे लोकेशन – काफिले की Innova Crysta।

कन्या इंटर कॉलेज की बच्चियों के हाथ में “पेट्रोल बचाओ” की तख्ती थमा दो, प्रिंसिपल को फोटो खिंचवा दो, खबर छपवा दो।

असली सवाल जो कोई नहीं पूछ रहा:
ई-व्हीकल कहां हैं? Ola, Ather, Tiago EV सब शोरूम में खड़े-खड़े बैटरी डाउन कर रहे हैं।
चार्जिंग पॉइंट कितने हैं ? बदायूं में पेट्रोल पंप 50, चार्जिंग स्टेशन 5 भी नहीं।
सरकारी बेड़ा कब बदलेगा ? DM से लेकर विधायक तक, सबकी गाड़ी आज भी तेल पीती है। नियम जनता के लिए, सुविधा खुद के लिए।

जब तक विकल्प महंगा और दुर्लभ रहेगा, तब तक “पैदल चलो” का ज्ञान सिर्फ गरीब के लिए रहेगा। अमीर का पेट्रोल, सरकार के कोटे से। गरीब का पसीना, सरकार के प्रचार के खाते में।

निष्कर्ष- पेट्रोल बचाने का सबसे आसान तरीका है – पहले VIP कल्चर का पेट्रोल बचाओ। 11 गाड़ियों का काफिला 1 कर दो, आधा देश का तेल बच जाएगा। तब न साइकिल की नौटंकी करनी पड़ेगी, न बच्चियों के कंधे पर तख्ती लादनी पड़ेगी।

वरना हर साल PM अपील करेंगे, हर साल अफसर साइकिल चलाएंगे, और हर साल हम एडिटोरियल लिखेंगे। शीर्षक वही रहेगा – “प्रचार जिंदाबाद, प्रदूषण जिंदाबाद”।

— प्रसंगवश – सुशील धींगडा की कलम से।

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