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उझानी में बच्चों की जान से खिलवाड़: ई-रिक्शा बना चलता-फिरता मौत का डिब्बा, 16 बच्चों को ठूंसकर भरते फर्राटा

उझानी में बच्चों की जान से खिलवाड़: ई-रिक्शा बना चलता-फिरता मौत का डिब्बा, 16 बच्चों को ठूंसकर भरते फर्राटा।

उझानी बदायूं 9 मई।

बच्चों की जिंदगी दांव पर लगाकर स्कूल भेजना अब मजबूरी बन गई है। उझानी में अढौली रेलवे फाटक मार्ग पर शनिवार सुबह ऐसा नजारा दिखा जिसने हर देखने वाले की सांसें रोक दीं। एक छोटे से ई-रिक्शा में ड्राइवर समेत 16 स्कूली बच्चे ठूंसकर ले जाए जा रहे थे। न सीट की जगह, न पैर रखने की जगह। कोई गेट पर लटका था तो कोई गोद में बैठा था।

तस्वीर बयां कर रही हकीकत-

वायरल तस्वीर में साफ दिख रहा है कि रिक्शे में आगे-पीछे, दाएं-बाएं हर तरफ बच्चे ही बच्चे हैं। बस्ते सीट के नीचे पड़े हैं और मासूम गेट से बाहर लटक रहे हैं। जरा सा झटका लगा और हादसा तय। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रोज का नजारा है। सुबह-शाम इसी तरह बच्चों को स्कूल ढोया जाता है।

परिवहन विभाग की ‘मौन स्वीकृति’-
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह खेल किसकी शह पर चल रहा है। परिवहन विभाग के अफसर सड़कों पर चेकिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं। ई-रिक्शा चालकों को न लाइसेंस की परवाह है, न ओवरलोडिंग का डर। विभाग की आंखें बंद हैं और बच्चे रोज मौत से आंख-मिचौली खेल रहे हैं। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती।

कौन लेगा जिम्मेदारी ?-
अगर कल कोई हादसा हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा? ई-रिक्शा चालक, स्कूल प्रबंधन या परिवहन विभाग? प्रशासन हादसे के बाद ही जागता है। उससे पहले सबकी ‘मौन स्वीकृति’ मिली रहती है।

क्या कहते हैं नियम-
नियमानुसार ई-रिक्शा में चालक समेत कुल 5 सवारी ही बैठ सकती हैं। लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर 16 बच्चों को बैठाया जा रहा है। न पुलिस रोकती है, न परिवहन विभाग टोकता है।

फिलहाल इस मामले में एआरटीओ बदायूं से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।_

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