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कॉमर्शियल सिलेंडर 993 रुपये महंगा: ढाबे-ठेले वालों की कमाई पर कैंची

कॉमर्शियल सिलेंडर 993 रुपये महंगा: ढाबे-ठेले वालों की कमाई पर कैंची, आम आदमी की थाली भी हुई महंगी।

उझानी-बदांयू 2 मई।

कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की बंपर बढ़ोतरी ने छोटे दुकानदारों से लेकर आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। घरेलू सिलेंडर के दाम भले न बढ़े हों, लेकिन होटल-ढाबों का खर्च बढ़ने से बाहर खाने वालों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

1 मई 2026 से 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 3,071.50 रुपये हो गई है। मुंबई में यह 3,024 रुपये, कोलकाता में 3,202 रुपये बढ़ोतरी एक बार में 993 रुपये की है।

फरवरी के बाद से ये तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है। अप्रैल में 195.50 रुपये और जनवरी में 111 रुपये दाम बढ़े थे।

आम आदमी को कैसे लग रहा झटका ?

चाय-नाश्ता महंगा
रेहड़ी, ठेले और फास्ट फूड का काम करने वाले सबसे ज्यादा परेशान हैं। उझानी के चाय की दुकान चलाने वाले पंडित उमेश कहते हैं, “पहले 1800-2000 में सिलेंडर आता था, अब 3000 पार हो गया। 10 रुपये की चाय 12 रुपये करनी पड़ी, ग्राहक कम हो गए।”

होटल-ढाबे का खाना हुआ महंगा,
रेस्टोरेंट, ढाबों और कैटरिंग का खर्च बढ़ गया है। व्यापारी बढ़ी लागत ग्राहकों पर डाल रहे हैं। दाल-रोटी, पूड़ी-सब्जी की प्लेट 10-15 रुपये तक महंगी हो गई है। उझानी के ढाबा संचालक प्रवेश कुमार शर्मा ने बताया कि महीने में 8-10 सिलेंडर लगते हैं। 993 रुपये बढ़ने से 8000 रुपये महीना खर्च बढ़ गया।

टिफिन-दफ्तर के खाने पर भी असर
छोटे टिफिन सर्विस वालों ने रेट 200-300 रुपये महीना बढ़ा दिए हैं। दफ्तर जाने वाले लोगों का मासिक बजट गड़बड़ा गया है।

घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी का डर।

कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने पर घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी बढ़ जाती है। कई ढाबे वाले चोरी-छुपे घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं, जिससे असली घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में दिक्कत होती है।

बुकिंग के नियम भी सख्त।

1 मई से LPG बुकिंग के नए नियम भी लागू हो गए हैं। अब शहरों में 25 दिन बाद ही सिलेंडर बुक होगा, पहले ये 21 दिन था। ग्रामीण इलाकों में 45 दिन इंतजार करना होगा। डिलीवरी के लिए OTP भी जरूरी कर दिया गया है।

कीमत क्यों बढ़ रही
?
भारत अपनी गैस का बड़ा हिस्सा विदेश से मंगाता है। 28 फरवरी से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की वजह से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है। डॉलर-रुपया रेट और परिवहन लागत बढ़ने से भी दाम बढ़ रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं मिलती, इसलिए इनके दाम में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है।

उझानी के होटल मालिक बोले, “तीन महीने में 3 बार दाम बढ़े। ग्राहक तो महंगाई से तंग हैं। हम रेट बढ़ाएं तो धंधा चौपट, न बढ़ाएं तो घाटा।”

सरकार ने घरेलू सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन बाहर खाने वाले, टिफिन मंगाने वाले और ठेले से नाश्ता करने वाले हर आम आदमी की जेब पर कॉमर्शियल सिलेंडर की ये मार पड़ रही है।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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