4:48 pm Thursday , 23 July 2026
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मीडिया का नाम बदनाम ना करों ?

मीडिया का नाम बदनाम ना करों ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ

दूर देश की बात तो मैं नहीं जानता परंतु बदायूं के बारे में एक बात कह सकता हूं कि जनपद में तमाम राजनेतिकों ने अपने मीडिया संेंटर बनाकर निजी कर्मचारी की तरह काम करने वाले मीडिया कर्मी रखे हुए हैं और यह बात पूरी तरह सत्य है जबकि कुछ राजनेतिकों ने अपने कुछ चहेतों को समाचार पत्रों एवं मीडिया संस्धानों के अलावा न्यूज पोर्टेल तथा सोशल मीडिया पर पत्रकारिता करने वालों को बंधुआ मजदूरों की तरह ठेके पर रखा हुआ है और वास्तविकता यही है कि इसमें लिप्त राजनेतिक और तथाकथित मीडिया कर्मी दनके इशारों पर कठपुतली का तरह काम कर रहे हैं और यह सारा खेल योजनाबृद्ध तरीके से किया जा रहा है। यही कारण है कि जनपद में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ आज ऐसे दोराहे पर खडा हुआ है जहां चौथे स्तम्भ का दम्भ करने वालों को तिजोरी भरने का मौका के अलावा काई सिद्धान्त नहीं दिख रहा।

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