स्वास्थ्य विभाग लापरवाह, अवैध नर्सिंगहोम , अल्ट्रासाउंड सेंटर चिह्नित तक नहीं।
चलता है तो चलने दो की तर्ज़ पर है, जिले के चिकित्सा अधीक्षक।
उझानी-बदांयू 3 अप्रैल।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से मानक विहीन और अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर, नर्सिंगहोम फल-फूल रहे हैं। हालत यह है कि किस सीएचसी क्षेत्र में कितने नर्सिंगहोम और झोलाछाप हैं, यह सूची स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। नर्सिंगहोमों के लिए जारी होने वाले मानकों का भी पालन नहीं हो रहा और कोई अधिकारी उन्हें देखने भी नहीं जाता। रिटायर्ड सीएमओ डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने एक साल पहले सूची तैयार करने के लिए सीएचसी प्रभारियों को निर्देश जारी किया था।
सीएचसी प्रभारी की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने क्षेत्र के मानक विहीन डायग्नोस्टिक सेंटर और अवैध नर्सिंगहोमों की सूची बनाकर दे और उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराए।
लेकिन सेटिंग का खेल ऐसा है कि जिले के किसी सीएचसी प्रभारी को अवैध नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर हो या डायग्नोस्टिक सेंटर नजर ही नहीं आऐ। जब किसी मे जच्चा-बच्चा की मौत होती है तो आनन-फानन कार्रवाई की बात व इन अवैध अस्पतालों को बंद कराने का आदेश दे दिया जाता है। फिर सब-कुछ वेसे ही चलता रहता है।
अब नऐ सीएमओ डॉ मोहन झा जो बदांयू जिले को नऐ नहीं है लोगों को उनसे आस है कि इन अवैध नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर व अल्ट्रासाउंड सेन्टर पर रोक लगाऐ। जेसे सहसवान में एक पुरुष के ही बच्चेदानी की रिपोर्ट दे दी गई।
स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी किया था कि हर नर्सिंगहोम के गेट पर बोर्ड लगेगा। इस पर इलाज करने वाले डॉक्टरों की सूची, संसाधनों की उपलब्धता, किन रोगों की इलाज की सुविधा है आदि का ब्योरा रहेगा लेकिन विभागीय अधिकारी यह व्यवस्था एक साल के बाद भी सुनिश्चित नहीं करा पाए हैं। इस वजह से रोगियों के साथ धोखा हो रहा।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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