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कछला गंगा का बढ़ा जलस्तर, सैकड़ों बीघा तरबूज़, ककड़ी,खरबूज की फसलें जलमग्न

कछला गंगा का बढ़ा जलस्तर, सैकड़ों बीघा तरबूज़, ककड़ी,खरबूज की फसलें जलमग्न।

उझानी-बदांयू 2 अप्रैल।

गंगा का जलस्तर बढ़ने से कछला गंगा किनारे के क्षेत्र में किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। इससे ककड़ी, कद्दू ,खीरा तरबूज और खरबूजा उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हुआ हैं।

गंगा किनारे बसने वाले दर्जनों गांव सहित कछला की रेतीली जमीन पर सेकडो किसान तरबूज़, खरबूज खीरा ककड़ी कद्दू लोकी की खेती करते हैं।

कछला के नन्हेलाल की डेढ़ बीघा फसल डूबी है। सोहन लाल की चार बीघा ककड़ी गंगा के पानी में समां गई।

कालूराम की तीन बीघा फसलें जलमग्न हो गईं। और राम सिंह व शेलेन्द्र की साढ़े तीन-साढ़े तीन बीघा फसलें भी प्रभावित हुई हैं। इसी तरह गंगा किनारे के दर्जनों गांवों में सेकडो किसानों की इन फसलों के खराब होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

सदर तहसील क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक गांवों के किसान प्रभावित हैं। ये किसान गंगा की रेत में खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा और कद्दू जैसी फसलें उगाते हैं। तरबूज और खरबूजा की फसलें तैयार होने की कगार पर हैं। खीरा और ककड़ी की फसलें एक सप्ताह से बाजारों में बिक्री के लिए जा रही थीं। अचानक बढ़े जलस्तर ने इन किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

लागत से अधिक नुकसान

किसान श्री पाल , रामसिंह, रामप्रसाद कश्यप, दीपेन्द्र कुमार और दुर्गपाल कश्यप ने अपनी परेशानी बताई। उन्होंने कहा कि एक बीघे की फसल में करीब दस से 15 हजार रुपये की लागत आती है। अभी तक लागत का एक चौथाई पैसा भी नहीं निकल पाया है। यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो उनकी फसलें पूरी तरह डूब जाएंगी। इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश की वजह से नरौरा बांध से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे गंगा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। आपदा विभाग के अनुसार सोमवार को 1200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था और मंगलवार को 12860 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। अगर इसी तरह एक दो बार पानी ओर छोडा गया तो कछला किनारे जो थोड़ी बहुत फसल बची है वह भी गंगा में समां जाएगी।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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