10:21 am Tuesday , 21 July 2026
BREAKING NEWS

श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, कर्त्तव्य और मर्यादा से परिपूर्ण : रवि महाराज

मनुष्य को पश्चाताप ओर ले जाता है, क्रोध और अहंकार में लिया गया निर्णय

बदायूं : श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन भगवान परशुराम विद्या मंदिर इंटर कालेज नेकपुर में कथा वाचक सामाजिक संत रवि जी समदर्शी महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाना चाहता है तो उसे भगवान श्रीराम के मर्यादित और आदर्श जीवन से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, कर्त्तव्य और मर्यादा से परिपूर्ण है। महाराज श्री ने नारद जी के अभिमान और भगवान की माया के प्रभाव का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब मनुष्य के भीतर अहंकार आ जाता है तो वह सत्य को पहचान नहीं पाता। उन्होंने विश्वमोहिनी स्वयंवर की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान की माया से स्वयं देवर्षि नारद भी मोहित हो गए थे। बाद में जब उनका मोह भंग हुआ तो उन्हें अपने अहंकार का एहसास हुआ। क्रोध और अहंकार में लिया गया निर्णय मनुष्य को पश्चाताप की ओर ले जाता है। इसके साथ ही महाराज श्री ने मनु और सतरूपा की कथा का श्रवण कराया।
कथा में आगे प्रताप भानु की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार कर्मों के प्रभाव से रावण, कुंभकर्ण और अन्य राक्षसों का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि जब अधर्म और अत्याचार बढ़ता है तब पृथ्वी भी पीड़ा से व्याकुल होकर गाय के रूप भगवान को पुकारती है।
महाराज श्री ने भावपूर्ण स्वर में कहा कि तुम दीनानाथ हो या दीनों के साथ हो। भगवान हमेशा दुखियों और पीड़ितों का सहारा बनते हैं। जब भी संसार में अन्याय बढ़ता है, तब भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।
इस मौके पर राम बहादुर पांडे, डा.विनय द्विवेदी, राहुल पांडे, रामौतार मिश्रा, केके उपाध्याय, अमित पांडे, एनसी मिश्रा, अश्विन भारद्वाज, केएल गुप्ता, वागीश, संजीव पराशर, राहुल चौबे, मोहित प्रभाकर, उत्पल सक्सेना, विजय शंखधार, संजू साहू, अंकुश, लीला पांडे, निवेदिता, कुसुम सक्सेना, प्राचार्य दुर्गेश गुप्ता, राजेश्वर पाठक, उत्पल सक्सेना आदि मौजूद रहे।

विज्ञापन एक्सप्रेस