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स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से बने लूट व मौत के केंद्र।
उझानी बदांयू 11 मार्च।
शहर सहित पूरे जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने निजी अस्पतालों को ‘लूट और मौत’ का केंद्र बना दिया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जिले में लगभग 100 अस्पताल ही पंजीकृत हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर के बरी बाईपास, शहर का मैन बाइपास से लेकर गलियों तक अवैध अस्पतालों की बाढ़ आई हुई है। हैरानी की बात यह है कि इन अस्पतालों में बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के झोलाछाप न सिर्फ मरीजों का इलाज कर रहे हैं, बल्कि धड़ल्ले से जटिल ऑपरेशन भी कर रहे हैं।
बीते छह महीनों में जिले में इलाज के दौरान लापरवाही से एक दर्जन से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। हर बार मौत के बाद अस्पताल संचालक कुछ समय को फरार हो जाते हैं और विभाग कागजी कोरम पूरा कर,व जांच की कहकर शांत बैठ जाता है।
ग्रामीण इलाकों से लेकर जिला मुख्यालय तक सड़क किनारे चल रहे इन अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई के बजाय स्वास्थ्य विभाग ने मौन सहमति दे रखी है।
तीमारदारों द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के बावजूद चंद दिनों की दिखावे की जांच के बाद ये अस्पताल फिर से नए नाम या चोरी-छिपे पुराने ढर्रे पर शुरू हो जाते हैं। रुपयों के लालच और विभागीय मेहरबानी का खामियाजा गरीब मरीजों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।——–
स्वास्थ्य विभाग से एमओआईसी को दी इन अवैध अस्पतालों को बंद कराने की जिम्मेदारी, लेकिन वह भी कार्रवाई करने से डरते हैं,वजह वही जाने नाम ना छापने के शर्त पर बताया कि किसी ना किसी की राजनैतिक पहुंच के चलते इन अवैध व बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे नर्सिंग होम व अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। क्योंकि नोकरी हमें भी करनी है।
राजेश वार्ष्णेय एमके
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