12:27 pm Wednesday , 22 July 2026
BREAKING NEWS

आदमी को चाहिये वक्त से डरकर रहे, वक्त है फूलों की सेज, वक्त है कांटों का ताज ?

बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ
बदायूं की राजनीति कुछ अजीबोगरीब रास्ते पर चलती दिख रही है जिसकी सत्ता आती है उसकी बहार आ जाती है और जब सत्ता चली जाती है तो फिर से वह अपने बेगानों जैसे हो जाते हैं जो अपनों का नजरंदाज करके सत्ताधारी दल में शामिल कराये जाते हैं। सबसे पहले राजनीति का यह खेल बदायूं जिले की पूर्व विधानसभा गुन्नौर ममें खूब दिखा, फिर यह दलबदल की यह रेल सहसवान में काफी दिनों तक छाई रही। कभी कंांग्रेस के दिग्गज रहे स्व श्रीकृष्ण गोयल बोफोर्स घोटाले के बाद वीपी सिंह के साथ बडे जोर – शोर से गए लेकिन अपना टिकट भी सुरक्षित नहीं करा पाए। बदायूं में सबसे लम्बी राजनेतिक पारी खेलने वाले इलाहबाद निवासी सलीम इकबाल शेरवानी पहली बार कांग्रेस के टिकट पर बदायूं के सांसद बने लेकिन 89 की यादों के बाद सपा में जाकर सपा से सांसद बनकर केंद्र सरकार में मंत्री बने और उनकी पारी का अंत सपा से टिकट ना मिलने के अंजाम पर समाप्त हुआ तो फिर कांग्रेस में वापस चले गए और जब वहां से संसद में जाने का रास्ता नहीं मिला तो फिर सपा में शामिल हो गए लेकिन अब गुमनाम राजनीति की चादर में दिन व्यतीत कर रहे हैं, स्वयं अपना टिकट तक नहीं पा सके। बदायूं में इधर से उधर होने वालों की लम्बी रेल जैसी सूची है, पूवग् सांसद डा संघमित्रा मौर्य, पूर्व विधायक सिनोद शाक्य, राम सेवक सिंह पटेल, मुस्लिम खां आज राजनीति में कौन से स्थान पर हैं उस पर लिखना जरूरी नहीं उनको स्वयं देखना जरूरी है।

विज्ञापन एक्सप्रेस
No posts found.