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उझानी की मेंथा फैक्ट्री में जिंदा जले मुनेन्द्र का मामला।
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
उझानी की मेंथा फैक्ट्री में बुधवार को लगी आग के बाद से लापता मुनेंद्र का मामला दिन ब दिन उलझता जा रहा है। प्रसाशन की लापरवाही का नतीजा है कि मुनेन्द्र के परिजनों के आंख के आंसू सूखने पर आऐ पर मुनेन्द्र को तलाश करना एक टेडी खीर साबित हो रहा है।
आखिर मुनेन्द्र की पत्नी को न्याय मिलेगा या ऐसे ही रोती तड़पती रहेंगी, रिश्तेदार परिवार के लोग मुनेन्द्र के शव को तलाशने को दर-दर की ठोकरें खाते रहेंगे। या कोई मसीहा निकल कर आएगा जो मुनेन्द्र के शव की तलाश कराने में परिजनों का सहायक होगा।
आज गाजियाबाद से 12 सदस्यों की एक्सपर्ट की टीम आई, मगर नतीजा सिफर, बताते हैं कि गाजियाबाद से आई टीम के पास संसाधन नहीं। उनके लीडर भी सात दिन में मलवा हटाने की बात कह रहे हैं,क्यों जिले के आला अधिकारी तो 24 घंटे में मुनेन्द्र के शव को तलाशने का दावा कर रहे थे।
या ख़ुद प्रसाशन नहीं चाहता कि मुनेन्द्र के शव को मलवे से तलाश कर रेखा को सोंपे कोई तो मजबूरी है ? जो रेखा का इंतजार व मुनेन्द्र का अध्याय बंद नहीं हो रहा।———-
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