बदायूं में पुलिस भर्ती: अफसरों के दावे धरे रह गए, भूखे-प्यासे अभ्यर्थी बोले- ‘नौकरी बाद में, पानी पहले दो साहब!’
बदायूं, 8 जून 2026 ।
पुलिस बनने का सपना लेकर बदायूं पहुंचे हजारों युवाओं का जोश प्रशासन की ‘फुलप्रूफ तैयारी’ ने पहले ही दिन ठंडा कर दिया। आलम ये रहा कि वर्दी की परीक्षा से पहले अभ्यर्थी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस गए।
दुकानें सील, पेट खाली, गला सूखा
सोमवार तड़के से ही बदायूं-उझानी के परीक्षा केंद्रों के बाहर ‘महाकुंभ’ जैसा नजारा था। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां अमृत की जगह एक घूंट पानी भी नसीब नहीं हुआ। प्रशासन की ‘सख्ती’ ऐसी कि एक किमी के दायरे में परिंदा तो क्या, परचून की दुकान भी न मिले। 600 किमी दूर से आए बच्चे सुबह 5 बजे लाइन में लगे, लेकिन बाथरूम क्या, पीने को पानी तक नहीं।
एक अभ्यर्थी का दर्द छलका: “साहब, पेपर का डर नहीं है। डर है कि कहीं भूख से ही बेहोश न हो जाएं। फॉर्म भरते वक्त नहीं बताया था कि भूख-प्यास की भी परीक्षा होगी।”
रेन बसेरे कागजों में, बच्चे स्टेशन पर
प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे — रेन बसेरे बनेंगे, पानी मिलेगा, खाना मिलेगा। ग्राउंड पर मिला क्या? बाबा जी का ठुल्लू। रातभर ट्रेन-बस में धक्के खाकर पहुंचे छात्र स्टेशन, बस स्टैंड और पालिका के फर्श पर लेटे मिले। होटल-धर्मशाला हाउसफुल, और सरकारी इंतजाम गायब। नहाना-धोना तो दूर, मुंह धोने तक को तरस गए।
जहां अफसरों की गाड़ियां केंद्रों के चक्कर काटती रहीं, वहीं उझानी में कुछ लोगों ने मोर्चा संभाल लिया। किसी ने हैंडपंप पर बाल्टी भर-भरकर पानी पिलाया तो किसी ने अपनी जेब से बिस्किट-केले बंटवाए। एक छात्रा बोली, “सरकार से ज्यादा भरोसा तो इन भैया लोगों पर है। कम से कम पानी तो पूछ लिया।”
दूसरे दिन की परीक्षा सिर पर है और बच्चे अभी से सहमे हुए हैं। डीएम कार्यालय से रटा-रटाया जवाब आया है कि ‘टीम भेजकर व्यवस्था दुरुस्त कराई जा रही है’। अब देखना ये है कि टीम पहुंचने से पहले अभ्यर्थी पहुंच पाएंगे या नहीं।
कुल मिलाकर हाल ये है कि पुलिस भर्ती कराने चले थे, बच्चों की भूख-प्यास की ‘भर्ती’ कर दी। दावे हवा-हवाई हुए, और सिस्टम की पोल खुलकर सबके सामने आ गई।

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