UP पंचायत चुनाव टालने पर हाईकोर्ट सख्त, प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर रोक।
कोर्ट ने कहा- असंवैधानिक प्रावधानों पर टिका है सरकार का आदेश, 13 जुलाई तक मांगा चुनाव का शेड्यूल।
प्रयागराज, 26 जून।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टालने और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कहा कि सरकार का यह कदम प्रथम दृष्टया असंवैधानिक है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-E और 243-K के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता और समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। जिन आदेशों के आधार पर 25 और 26 मई 2026 को प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया गया, वे प्रावधान पहले ही असंवैधानिक घोषित किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और पंचायत चुनाव कराने की स्पष्ट समयसीमा हलफनामे के साथ पेश की जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि 10 जून 2026 को मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। चुनाव प्रक्रिया केवल राज्य सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण रुकी हुई है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जब तक सरकार नए वैध आदेश नहीं लाती, तब तक असंवैधानिक प्रावधानों के आधार पर जारी आदेशों के तहत ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी।
दरअसल, पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकार ने 469 निवर्तमान प्रधानों को 6 महीने के लिए प्रशासक बनाने का आदेश दिया था। माना जा रहा था कि सरकार विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव कराना चाहती है। लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले से सरकार की रणनीति को झटका लगा है।



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