जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नियमों में बड़ा बदलाव, योगी कैबिनेट ने दी नई नियमावली को मंजूरी।
लखनऊ 18 मई।
उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को आसान और डिजिटल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026’ को मंजूरी दे दी गई।
नए नियमों के मुताबिक अब जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने पर प्रमाण पत्र पूरी तरह निःशुल्क मिलेगा। आवेदक इसे ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक रूप में भी डाउनलोड कर सकेंगे। घटना की सूचना 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार को देना अनिवार्य होगा।
देरी पर लगेगा शुल्क, तय हुआ स्लैब
21 से 30 दिन के भीतर -₹20 विलंब शुल्क के साथ रजिस्ट्रार करेंगे पंजीकरण।
30 दिन से 1 साल के भीतर -जिला रजिस्ट्रार/अपर जिला रजिस्ट्रार के आदेश पर ₹50 शुल्क
1 साल बाद- डीएम, एसडीएम या अधिकृत मजिस्ट्रेट के आदेश पर ₹100 शुल्क ।
बिना नाम के पंजीकरण पर राहत-
अगर बच्चे का नाम नहीं रखा गया है तो जन्म से 12 महीने के भीतर नाम की सूचना देनी होगी। 12 महीने बाद 15 साल तक विलंब शुल्क के साथ नाम दर्ज हो सकेगा।
सर्च और कॉपी फीस भी तय-
पहले साल की एक प्रविष्टि खोजने पर ₹20, हर अतिरिक्त साल के लिए ₹20, प्रमाण पत्र की कॉपी के लिए ₹50 और अनुपलब्धता प्रमाण पत्र के लिए ₹20 शुल्क लगेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जन्म, मृत्यु और मृत-जन्म के रजिस्टर स्थायी अभिलेख होंगे। इन्हें नष्ट नहीं किया जाएगा। नियमों में दिक्कत आने पर अपील का प्रावधान भी रखा गया है।
नई नियमावली ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969’ के तहत लागू होगी। सरकार का दावा है कि इससे प्रक्रिया पारदर्शी होगी और लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।




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