बैंक भगाई तो वोट की चोट पड़ेगी: रियोनाई की महिलाओं ने संभाली कमान, बोलीं – मर्द घर बैठें, हम लड़ेंगी।
बिल्सी बदांयू 16 मई।
38 साल से गांव में जमे स्टेट बैंक को अचानक उखाड़ने की तैयारी क्या हुई, रियो नाई की औरतों का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। शुक्रवार सुबह 10 बजे बैंक के बराबर में ही तहसील अध्यक्ष अलका यादव की अध्यक्षता में सैकड़ों महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया। शाम 5 बजे तक चले इस धरने में नारे ऐसे लगे कि अफसरों के कान खड़े हो जाएं: “बैंक नहीं तो वोट नहीं, बैंक नहीं तो शराब का ठेका नहीं!”
औरतें मैदान में, मर्द घर में
अलका यादव ने माइक थामते ही हुंकार भरी: “पुरुष बैठे हैं घर, औरतें संभाल लेंगी कमान”। बस फिर क्या था, महिलाओं का जोश देखने लायक था। हाथों में तख्तियां, जुबान पर एक ही सवाल: 38 साल से शांति से चल रहा बैंक अचानक क्यों भगाया जा रहा है? गांव में तो आज तक कोई लूट-पाट, कोई दुर्घटना नहीं हुई।
जिला अध्यक्ष ने दागे सवाल
मौके पर पहुंचे जिला अध्यक्ष रामा शंकर शंख धार ने दो टूक कहा: “बैंक अधिकारी हिम्मत है तो जनता के बीच आओ। बताओ, रियोनाई से बैंक का तबादला क्यों?” उन्होंने याद दिलाया कि सरकारी संस्थाएं जनता की सेवा के लिए हैं, उद्योगपतियों की तरह मुनाफा कमाने के लिए नहीं। “सरकार वोट के बदले सुविधा देती है, भीख में नहीं। यह हमारा हक है, कोई छीन नहीं सकता।”
अफसरों को चेतावनी
ग्रामीणों का दर्द साफ है: बैंक हट गया तो पेंशन, किसान क्रेडिट कार्ड, लेन-देन के लिए 20 किमी भागना पड़ेगा। बूढ़े-बुजुर्ग, महिलाएं कैसे जाएंगे? धरने में बैठी महिलाओं ने साफ कर दिया: “अफसरों के लिए ये मामूली बात होगी, हमारे लिए जिंदगी-मौत का सवाल है।”
शाम तक पूरा गांव “लड़ेंगे जीतेंगे” और “जय जवान जय किसान” के नारों से गूंजता रहा। महिलाओं ने ठान लिया है कि जब तक बैंक वापस नहीं आता, आंदोलन जारी रहेगा।
badaunexpress.com badaunexpress.com | www.badaunexpress.com

