सियासत से सादगी तक: बदायूं के विधायक ने बदली राजनीति की तस्वीर”
भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता का बड़ा संकल्प— अब हर रविवार साइकिल से करेंगे जनसंपर्क, 1984 से न खरीदा सोना, परिवार में तेल की खपत भी आधी करने का फैसला
बदायूं।
देश की राजनीति जहां वीआईपी कल्चर, बड़ी गाड़ियों और दिखावे की चमक-दमक के लिए अक्सर सुर्खियों में रहती है, वहीं उत्तर प्रदेश के बदायूं सदर से भाजपा विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने एक ऐसा ऐलान किया है जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आह्वान से प्रेरित होकर विधायक ने अपने जीवन और जनसंपर्क शैली में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है।
विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने घोषणा की है कि अब वह प्रत्येक रविवार को अपने सभी स्थानीय कार्यक्रमों, जनसभाओं और जनसंपर्क अभियानों में केवल साइकिल का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि शहर में किसी भी कार्यक्रम में जाना होगा तो वह सरकारी या निजी वाहन से नहीं बल्कि साइकिल से ही जाएंगे। इतना ही नहीं, उनके साथ चलने वाले गनर और निजी सचिव भी उसी दिन साइकिल से ही उनके साथ रहेंगे।
विधायक ने कहा कि यह निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक संदेश देने का प्रयास है। उनका मानना है कि बढ़ते प्रदूषण, ईंधन की खपत और बदलती जीवनशैली के बीच जनप्रतिनिधियों को खुद उदाहरण बनकर सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नेता खुद सादगी अपनाएंगे, तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन दिखाई देगा।
महेश चंद्र गुप्ता ने अपने निजी जीवन को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 से उन्होंने न तो सोना खरीदा है, न पहना है और न ही उसका उपयोग किया है। विधायक के अनुसार यह उनका वर्षों पुराना व्यक्तिगत संकल्प है, जिसे उन्होंने आज तक निभाया है। उन्होंने कहा कि इंसान की असली पहचान उसके कार्य और व्यवहार से होती है, न कि आभूषणों और दिखावे से।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वास्थ्य और खानपान को लेकर दिए गए संदेश का असर भी विधायक के फैसलों में साफ दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने परिवार में खाद्य तेल की खपत लगभग 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्णय लिया है। अब घर में तली-भुनी और अत्यधिक तेलीय वस्तुओं का उपयोग सीमित किया जाएगा। विधायक ने इसे स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो विधायक का यह फैसला केवल एक व्यक्तिगत घोषणा नहीं बल्कि जनता के बीच अलग पहचान बनाने की रणनीति भी माना जा रहा है। ऐसे दौर में जब नेताओं की जीवनशैली अक्सर आलोचनाओं में रहती है, बदायूं के विधायक का यह “सादगी मॉडल” लोगों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर भी विधायक के इस कदम को लेकर जमकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पर्यावरण संरक्षण और सादगी की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ इसे “नई राजनीति की नई सोच” कह रहे हैं। फिलहाल इतना तय है कि बदायूं की राजनीति में यह घोषणा चर्चा का बड़ा केंद्र बन चुकी है और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।
केशव गुप्ता




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