नौरंगाबाद–चकोलर में 24 घंटे खनन, 800–1000 रुपये प्रति ट्रॉली वसूली ‘कम परमिशन, ज्यादा उठान’ का खेल जारी
कुंवरगांव क्षेत्र के नौरंगाबाद और चकोलर इलाके में अवैध मिट्टी खनन का खेल अब खुलकर सामने आने लगा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यहां दिन-रात खनन जारी है और 800 से 1000 रुपये प्रति ट्रॉली के हिसाब से मिट्टी बेची जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल अब पुलिस और खनन विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। जब खनन खुलेआम हो रहा है और भारी वाहन लगातार सड़कों पर दौड़ रहे हैं, तो क्या जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी नहीं है? या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई से दूरी बनाई जा रही है?
आरोप है कि कागजों में सीमित ट्रॉलियों की परमिशन दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। खनन करने वाले लोग कागजों में फावड़े से सीमित मात्रा में मिट्टी उठाने की अनुमति लेते हैं, जबकि मौके पर सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली से बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है।
“कागजों में फावड़ा, जमीन पर ट्रैक्टर-ट्रॉली—नियमों की आड़ में बड़ा खेल”
इस पूरे खेल में कुछ सफेदपोश नेताओं का संरक्षण होने की चर्चाएं भी इलाके में जोर पकड़ रही हैं। बताया जा रहा है कि खनन से जुड़े लोग खुलेआम अपनी ‘ऊपर तक पहुंच’ का हवाला देते हैं, जिससे कार्रवाई का डर लगभग खत्म नजर आता है।
खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है।
लगातार चल रहे इस अवैध कारोबार से जहां एक ओर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़कों की हालत खराब हो रही है और आसपास के खेतों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या पुलिस और खनन विभाग की खामोशी इस खेल को खुली छूट दे रही है?
क्या सफेदपोश संरक्षण के चलते कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?

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