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साल में तीन बार होगी हरी मिर्च की खेती, एक बार लगाए कई साल बैठकर कमाए

बदांयू 12 फरवरी।

हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन रही है इसमें लगाने में कम लागात और समय की बचत होती है। सही समय, संतुलित खाद और सिंचाई से साल में तीन बार बेहतर पैदावार मिल सकती है। भारत की आधी से अधिक आबादी आज भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती-किसानी पर निर्भर है। बदलते समय के साथ किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर रुख कर रहे हैं। खासकर बागवानी फसलों ने किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इन्हीं बागवानी फसलों में हरी मिर्च एक ऐसी फसल है, जिसकी मांग हर मौसम और हर घर में बनी रहती है। कम लागत, सीमित संसाधन और सही तकनीक के साथ हरी मिर्च की खेती कर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

मिर्च विशेषज्ञ बताते हैं कि मिर्च एक ऐसी सब्जी है, जो रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है। शायद ही कोई घर होगा, जहां मिर्च का इस्तेमाल न होता हो। इसी वजह से बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। उन्होंने बताया कि हरी मिर्च की खेती साल में तीन बार की जा सकती है, लेकिन इसके लिए सही समय का चुनाव बेहद जरूरी है।

खुले खेत में हरी मिर्च की बुवाई के लिए सितंबर-अक्टूबर, जून-जुलाई और फरवरी-मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। वहीं, अगर किसान ग्रीन हाउस, पॉली हाउस या नेट हाउस की सुविधा रखते हैं, तो वे किसी भी मौसम में मिर्च की खेती कर सकते हैं।

अगर किसी किसान के पास आधुनिक संसाधन नहीं हैं और केवल खुला खेत उपलब्ध है, तब भी वह आसानी से हरी मिर्च की खेती कर सकता है। इसके लिए सबसे पहले खेत की मिट्टी पर ध्यान देना जरूरी है। हरी मिर्च के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त होती है, जिसका पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। खेत की गहरी जुताई कर उसमें अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद मिलानी चाहिए। इसके बाद 6 इंच चौड़ी क्यारियां बनाकर नर्सरी से तैयार पौधों की रोपाई 30 से 40 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए।

अच्छी पैदावार के लिए खाद और सिंचाई का संतुलन बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन, 12 किलो फास्फोरस और 12 किलो पोटाश देना लाभकारी होता है। सिंचाई की बात करें तो मिर्च की फसल को बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था होने पर सप्ताह में तीन बार पानी देना पर्याप्त है, जबकि सामान्य तरीके से सिंचाई करने पर सप्ताह में एक से दो बार पानी देना काफी होता है। अगर पौधों की सही देखभाल की जाए, तो एक एकड़ में करीब 12 क्विंटल हरी मिर्च की पैदावार मिल सकती है।जब मिर्च पूरी तरह हरी हो जाए और आकार ले लें, तब उसकी तुड़ाई करनी चाहिए। यदि किसान सूखी लाल मिर्च बनाना चाहते हैं, तो फलों को पूरी तरह पकने दें और बाद में तुड़ाई कर धूप में सुखा लें।
इस तरह हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए कम लागत में बेहतर आमदनी का जरिया बन सकती है।

सोम्य सोनी

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