दिल्ली से चल रही वृंदावन तक सनातन पद यात्रा बागेश्वर धाम सरकार के नेतृत्व जिसका 16नवम्बर को विश्राम है | जिस यात्रा में अनेकों साधु संत,सिनेमा जगत के स्टार,देश के धुरंधर बल्लेबाज, विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक हस्तियों का आगमन हो रहा है इसी बीच सोशल मीडिया से लेकर अनेकों प्लेटफार्म पर लोग अपने- अपने विचार इस यात्रा को लेकर दे रहे हैं जिसमें एक तबका ऐसा है जो समाज को दिशा देता है जिसमें विभिन्न जनपदों के साहित्यकारों से बात की गई तो उन्होंने अपने -अपने विचारों को रखा और कहा नजीबाबाद के कवि अरूण दीक्षित कहते हैं सनातन पद यात्रा भारतवासियों में अपने पुराने गौरव, अस्तित्व और स्वाभिमान की भावना की जागृति का प्रयास है।
मुरादाबाद में प्रवक्ता पल्लवी शर्मा कहती हैं बागेश्वर धाम की सनातन पदयात्रा शान्ति, राष्ट्रवाद की भावना, सामाजिक एकता और जाति- पांति के भेदभाव को दूर करने का प्रयास है

गाजियाबाद की साहित्यकार प्रतिभा मिश्रा कहती हैं बागेश्वर धाम की यात्रा
में हर व्यक्ति के मन में सनातन के अस्तित्व और स्वाभिमान की भावना को जागृत करने का प्रयास किया जा रहा है!
कवि राहुल श्यामजग कहते हैं भारत की नीति सदा से ही वसुधैव कुटुंबकम् की रही है और इस परिवार के अंदर भारत के अपने ही बच्चे आपस में जातिवाद में उलझ कर इस कड़ी को कमज़ोर करें तो उपरोक्त नीति अधूरी ही साबित होगी तो इस नीति को पुष्ट करने में सनातन संस्कृति भारत में एकता के सूत्र की सबसे मज़बूत कड़ी को बनाए रखने के लिए सनातन पदयात्रा अत्यंत सराहनीय कार्य हैं
बदायूं के युवा कवि षट्वदन शंखधार कहते हैं कि हिन्दू सनातन पद यात्रा इतिहास बनेगी जिसमें सभी लोग शामिल हो रहे हैं यह यात्रा उन विधर्मियों के लिए है जो सनातन को मिटाने की बात करते हैं | इस यात्रा से हिन्दू अवश्य जाग्रत होगा और इसके सार्थक परिणाम भी नजर आयेंगे|
राजकीय महाविद्यालय सहसवान की प्रोफेसर डॉ शुभ्रा माहेश्वरी ने कहा कि आज सनातन पर संकट है आज साधु संत सनातन को बचाने की मुहिम चला रहे हैं आज हम सबको मिलकर जाग्रत होना चाहिए| जिससे हमारी संस्कृति सनातन बचा रहें|
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