पीलीभीत: हिंदू महिला पर मुस्लिम दबंगों का बर्बर हमला, हिंदू महासभा की तत्परता से चारों आरोपी चंद घंटों में गिरफ्तार, पीड़ित परिवार को मिला न्याय
पीलीभीत जनपद की तहसील बीसलपुर के ग्राम गोवल में 24 जुलाई 2025 को एक अत्यंत निंदनीय, संवेदनशील और समाज को झकझोर देने वाली घटना सामने आई, जिसमें गांव के ही कुछ मुस्लिम समुदाय के दबंगों ने हिंदू दंपति गेंदन लाल और उनकी पत्नी सुशीला देवी को बेरहमी से पीटा। बताया जा रहा है कि मामूली कहासुनी को लेकर सद्दीक पुत्र वली मोहम्मद, मुन्ना पुत्र सद्दीक, मोहम्मद रफी पुत्र सद्दीक और मोहम्मद आसिम पुत्र सद्दीक ने सुनियोजित ढंग से महिला को घेर लिया, गंदी-गंदी गालियां देते हुए न केवल मारपीट की बल्कि उसके सिर पर लाठी से वार कर दिया, जिससे सुशीला देवी का सिर फट गया। डॉक्टरों द्वारा तत्काल उपचार के दौरान 12 टांके लगाए गए और महिला की मानसिक स्थिति भी बिगड़ गई।
हमले के दौरान महिला को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, अश्लील भाषा का प्रयोग करते हुए दबंगों ने पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित परिवार ने इस पूरी घटना की शिकायत बीसलपुर कोतवाली में कई बार की, लेकिन किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, जिससे परिवार में भय और आक्रोश का माहौल था।
तत्पश्चात पीड़ितों ने अखिल भारत हिंदू महासभा से न्याय की अपील की, जिस पर संगठन के पदाधिकारी तुरंत सक्रिय हुए। नगर अध्यक्ष सुनील अवस्थी के नेतृत्व में नगर महामंत्री महंत अवनीश रतन, महंत मुकेश गोशामी, रवि यादव, शिवम् गंगवार, महेंद्र पाल शर्मा, संजीव कुमार, दीपक मौर्य, योगेंद्र, पीयूष कुमार (पत्रकार), विशाल, सुमित कुमार, कार्यालय प्रभारी पिंटू सक्सेना, अनुज शर्मा, प्रतीक सक्सेना, सर्वेश कुमार, उपेंद्र, गौरव, शेखर पांडे सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बीसलपुर कोतवाली पहुंचे। पीड़िता के साथ मौजूद संगठन ने SHO को लिखित ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर कार्यवाही नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
संगठन के दबाव, जन आक्रोश और मीडिया कवरेज के चलते प्रशासन हरकत में आया और उसी शाम, 24 जुलाई को ही बीसलपुर पुलिस ने चारों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिससे पीड़ित परिवार और गांव के हिंदू समुदाय को राहत मिली।
हिंदू महासभा ने पीड़िता से मुलाकात कर हर संभव न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया और प्रशासन से मांग की कि आरोपियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा चलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी महिला के साथ इस प्रकार का बर्बर व्यवहार न हो। संगठन ने यह भी मांग की कि पीड़िता को सरकारी आर्थिक सहायता, सुरक्षा और मानसिक चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।
यह घटना केवल एक महिला पर हमला नहीं, बल्कि समाज की मर्यादा, धार्मिक सहिष्णुता और महिला सुरक्षा पर खुला हमला था। लेकिन जिस प्रकार हिंदू महासभा ने सक्रियता दिखाई और प्रशासन ने शीघ्र कार्यवाही कर चारों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया, वह उदाहरण बन गया है कि जब समाज संगठित होता है, तब न्याय निश्चय ही संभव होता है।
इस पूरी घटना ने जहां एक ओर प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर किया, वहीं दूसरी ओर यह दिखा दिया कि समाज में जब संगठन और आमजन जागरूक हो जाएं, तो अन्याय करने वालों को बच पाना नामुमकिन है। गांव में फिलहाल पुलिस तैनात है और शांति व्यवस्था बनी हुई है।
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