6:39 am Saturday , 1 August 2026
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झूठी शान की शादी दिखावे की दुनिया – प्रदीप प्रजापति

समाज दर्पण प्रदीप प्रजापति के साथ

आज का समाज उस पड़ाव पर खड़ा है जहाँ शादी जैसे पवित्र बंधन को भी दिखावे और आडंबर की भेंट चढ़ा दिया गया है। शादी का अर्थ अब केवल दो आत्माओं का मिलन नहीं रह गया, बल्कि यह एक “इवेंट” बन चुका है — ऐसा इवेंट जिसमें लाखों रुपये सिर्फ दूसरों को दिखाने के लिए खर्च किए जाते हैं।

जहाँ पहले शादियाँ सादगी, प्रेम और परंपरा का प्रतीक हुआ करती थीं, वहीं आज झूठी शान और सोशल मीडिया की पोस्ट के लिए की जाती हैं। महंगे बैंड, लग्ज़री गाड़ियाँ, विदेशी लोकेशन पर प्री-वेडिंग शूट, डिज़ाइनर कपड़े और बड़े-बड़े कैटरिंग इंतजाम – क्या यह सब ज़रूरी है?

दुखद यह है कि इस दिखावे की दौड़ में आम मध्यम वर्गीय परिवार अपने सीमित साधनों से बाहर जाकर कर्ज़ में डूब जाते हैं। लोग “क्या कहेंगे” के डर से अपने बच्चों की शादी को एक सामाजिक प्रदर्शन बना देते हैं। लड़के और लड़की का जीवन भले बाद में संघर्षों से भर जाए, लेकिन शादी के दिन का “इंप्रेशन” परफेक्ट होना चाहिए – यही मानसिकता बन गई है।

इस दिखावे की दुनिया ने रिश्तों की गहराई को खोखला कर दिया है। रिश्तेदार सिर्फ खाने और गिफ्ट की तुलना करने आते हैं। सच्चे आशीर्वाद और आत्मीयता अब तस्वीरों तक सीमित रह गई हैं। ऐसी शादियाँ बाहरी रूप से भले भव्य लगें, लेकिन भीतर से भावनात्मक रूप से खाली होती हैं।

हमें यह समझना होगा कि विवाह जीवन की एक नई शुरुआत है, न कि कोई प्रतियोगिता। शादी का असली उद्देश्य है — साथ चलने का वादा, आपसी समझ, और विश्वास का रिश्ता। इसलिए आवश्यक है कि हम झूठी शान की बजाय सच्चे रिश्तों को प्राथमिकता दें।

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